जेएनएन, अंबाला। शादी में जब सात फेरे लिए जाते हैं तो पति-पत्नी एक-दूसरे का सात जन्मों तक साथ निभाने की कसम खाते हैं, लेकिन शादी के इस पवित्र रिश्ते में दहेज रूपी दानव दरार डाल रहा है। यही कारण है कि थानों में दहेज उत्पीड़न और विवाहिताओं से मारपीट कर उन्हें घर से बाहर निकाल दिए जाने के मामलों में इजाफा होता जा रहा है। हालांकि ऐसे मामलों को निपटाने के लिए पुलिस ने प्रत्येक जिले में दो-दो ऐसे सेंटर बना दिए हैं जहां दोनों पक्षों से बातचीत कर समझौता करवाने का प्रयास किया जाता है. लेकिन जब समझौता नहीं हो पाता तो ससुराल पक्ष के खिलाफ केस दर्ज कर लिया जाता है।

पिछले दो सालों में दहेज उत्पीड़न के करीब 150 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं नए साल के पहले महीने में अभी तक करीब 15 नए मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2017 में जिले के विभिन्न थानों में करीब 56 मामले दहेज उत्पीड़न, मारपीट के दर्ज हुए। वर्ष 2018 में 70 के पार पहुंच गया था। इनमें दहेज हत्या या फिर ससुरालियों से तंग आकर आत्महत्या करने के मामले अलग से थानों में दर्ज किए गए है।

नए साल में अभी तक 15 मामले हुए दर्ज

नारायणगढ़ में भी एक अतिरिक्त महिला थाना खोला गया है, जिसमें बीते सप्ताह ही तीन नए मामले दहेज उत्पीड़न के दर्ज किए गए है। अंबाला शहर सिटी थाने में 4 जनवरी को रविदास बस्ती निवासी ममता देवी की शिकायत, नारायणगढ़ महिला थाने में 23 जनवरी को स्थानीय वार्ड नंबर-5 निवासी नेहा वालिया, स्थानीय वार्ड नंबर-6 सपना रानी, कालाआम्ब शिव कॉलोनी निवासी हरप्रीत कौर, शहर सेक्टर-9 निवासी सानिया तनेजा की शिकायत के अलावा अन्य की शिकायत पर भी अलग-अलग थानों में केस दर्ज किया गया।

लंबी जांच के बाद दर्ज किए जाते हैं मामले

पहले कोई भी विवाहित महिला पुलिस थाने में शिकायत देकर ससुराल वालों के खिलाफ केस दर्ज करवा देती थी। ऐसे में सरकार ने दहेज उत्पीड़न के मामले बढ़ते देख मामला दर्ज किए जाने से पहले ही इसकी जांच करने के लिए सभी जिलों में सेंटर खुलवा दिए थे। इसी कारण अब अगर कोई भी पीड़िता विवाहिता अपनी शिकायत देती है तो पुलिस कई महीने तक पहले उस पर दोनों पक्षों से आमने-सामने बातचीत करती है। पुलिस कोशिश करती है कि इनके बीच समझौता हो जाए और केस दर्ज न किया जाए। अधिकतर मामलों में समझौता नहीं होने के कारण पुलिस को केस दर्ज करना पड़ता है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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