जागरण संवाददाता, अंबाला

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के प्रयासों से छावनी का नागरिक अस्पताल प्रदेश का ऐसा अस्पताल बन गया है, जिसमें मरीजों को दी जाने वाली सभी प्रकार की सुविधाएं आनलाइन कर दी गई है। बेशक अस्पताल पर आनलाइन सुविधा होने का तमगा लग गया हो, लेकिन डॉक्टरों व स्टाफ की लापरवाही से इस योजना को पलीता लगाया जा रहा है। क्योंकि अधिकतर डॉक्टर और स्टाफ अभी तक भी आनलाइन प्रक्रिया को इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

इस लापरवाही के कारण मरीजों को दिए जा रहे इलाज और उनके टेस्टों की रिपोर्ट का डाटा अभी तक सरकारी साफ्टवेयर पर पोर्टल वेबसाइट पर अपडेट नहीं हो रहा है। ऐसे में अगर मरीज को अपना इलाज किसी दूसरे जिले में करवाना पड़ जाए तो डाटा अपडेट नहीं होने के कारण डॉक्टर को उसके इलाज का पता नहीं चल सकेगा कि पुराने डॉक्टर ने मरीज को अभी तक क्या दवाई दी है। ई-उपचार के तहत हुआ आनलाइन

दरअसल स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेशभर के नागरिक अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में हरियाणा स्टेट हेल्थ रिसोर्स सेंटर के तहत ई-उपचार प्रोजेक्ट शुरू किया हुआ है। इसमें मरीज के कार्ड पर आनलाइन यूएसआइडी नंबर की स्लिप लगाई जाती है, जिससे उसका पता कंप्यूटर में ऑनलाइन दर्ज हो जाता है। छावनी नागरिक अस्पताल में इसी ई-उपचार के तहत सभी प्रकार की सुविधाओं को आनलाइन किया गया है। डॉक्टर नहीं कर रहे इस्तेमाल

दरअसल ई-उपचार के तहत सभी डॉक्टरों को उनके कमरे में एक-एक कंप्यूटर दिया गया है। मरीज के कार्ड बनते ही उसका डाटा डॉक्टर के कंप्यूटर पर पहुंच जाता है। ऐसे में डॉक्टर को मरीज चेक करने के बाद उसके कार्ड पर लिखी गई सारी दवाई, टेस्ट और अन्य रिपोर्ट कंप्यूटर पर दर्ज करनी होती है। आर्थोपेडिक्स विशेष, सर्जन, फीजियोथैरेपी, अल्ट्रासाउंड वाले रेडियोलाजिस्ट व आयुष वाले इसका कभी प्रयोग नहीं करते है। लेबर रूम और वार्ड का डाटा भी नहीं होता अपडेट

ई-उपचार के तहत अस्पताल में रजिस्ट्रेशन, ओपीडी, फार्मेसी, इमरजेंसी रजिस्ट्रेशन, आइपी बि¨लग, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड गायनी वार्ड, पुरुष व महिला वार्ड, लेबर रूम, प्राइवेट वार्ड, इमरजेंसी वार्ड सहित फार्मेसी के मुख्य स्टोर को भी आनलाइन कर दिया गया है। लेकिन इनमें से लेबर, गायनी, प्राइवेट वार्ड, महिला-पुरुष वार्ड और फार्मेसी का डाटा कभी आनलाइन अपडेट नहीं किया जाता है। टेस्ट रिपोर्ट आनलाइन के लिए नहीं स्टाफ

अस्पताल में अन्य सेवाओं की तरह अब मरीजों की टेस्ट रिपोर्ट को आनलाइन करने के लिए भी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। हालांकि तकनीकी कारणों के चलते प्रारंभिक तौर पर कुछ दिक्कतें आ रही हैं। रिपोर्ट आनलाइन किए जाने के बाद मरीजों को काफी राहत मिलेगी, लेकिन यहां मरीजों के टेस्टों की रिपोर्ट ऑनलाइन करने के लिए कम से कम पांच कंप्यूटर और इतने ही संख्या में आपरेटर भी चाहिए होंगे। मुझे इस बारे में जानकारी नहीं

अंबाला छावनी अस्पताल को ई-उपचार के तहत आनलाइन किया गया है। यहां आने वाले मरीजों के रजिस्ट्रेशन से लेकर उन्हें दिए जाने वाले उपचार का सारा डाटा डॉक्टर व स्टाफ को अपने-अपने कंप्यूटर पर आनलाइन करना है। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो मैं इसे चेक करवाता हूं कि आखिर इसे फालो क्यों नहीं किया जा रहा है।

डॉ. सतीश कुमार अग्रवाल, महानिदेशक, स्वास्थ्य विभाग।

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