दिल्ली से अंबाला तक ₹5983 करोड़ की लागत से बिछाई जाएंगी दो और लाइनें, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू
दिल्ली से अंबाला के बीच दो नई रेल लाइनों के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसका उद्देश्य रेल यातायात क्षमता बढ़ाना है।

अंबाला रेलवे स्टेशन (फाइल फोटो)
HighLights
दिल्ली से अंबाला तक दो नई रेल लाइनें बिछाने की तैयारी
5,983 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू
करनाल, पानीपत, अंबाला जिलों में जमीन अधिग्रहण पर आपत्तियां आमंत्रित
दीपक बहल, अंबाला। दिल्ली से अंबाला के बीच दो और रेल लाइनें बिछेंगी। रेल यातायात की क्षमता बढ़ाने की दिशा में रेलवे ने दिल्ली-पानीपत-अंबाला तीसरी एवं चौथी लाइन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रेल मंत्रालय के उत्तर रेलवे निर्माण संगठन की ओर से भारत के राजपत्र में जारी अधिसूचनाओं में हरियाणा के करनाल, अंबाला और पानीपत जिलों में परियोजना के लिए आवश्यक जमीन का ब्योरा जारी किया है। यह पूरा प्रोजेक्ट 5,983 करोड़ रुपये का है।
रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 20ए (1) के तहत केंद्र सरकार ने इन जमीनों के अधिग्रहण का काम शुरू किया है। जिन लोगों का प्रस्तावित अधिग्रहित भूमि में मालिकाना हक या कोई अन्य हित है, उन्हें आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से 30 दिन के भीतर लिखित आपत्ति संबंधित जिले के जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) के समक्ष जमा कराई जा सकेगी।
करनाल में 3.1066 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की
करनाल तहसील के डिपो गांव की कुल 3.1066 हेक्टेयर जमीन परियोजना के लिए चिह्नित की है। अधिसूचना में संबंधित भू-स्वामियों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए जिला राजस्व अधिकारी, करनाल को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है।
पानीपत में 13 गांवों तक पहुंचेगी प्रक्रिया
पानीपत में भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें समालखा के सात और पानीपत के छह गांवों की जमीन शामिल है। अधिसूचना में समालखा तहसील के भोड़वाल माजरी, चुलकाना, किवाना, मनाना, करहंस, मछरौली व झट्टीपुर शामिल है। वहीं पानीपत तहसील के दीवाना, सिवाह, काबड़ी, सराय बछड़ा, निजामपुर और इंसार की जमीन रेल लाइन में आ रही है।
पहले आपत्ति, फिर आगे बढ़ेगी अधिग्रहण प्रक्रिया
अधिसूचना जारी होने के बाद अब प्रभावित भू-स्वामियों के लिए आपत्ति का चरण शुरू हुआ है। निर्धारित 30 दिन में प्राप्त आपत्तियों पर सक्षम प्राधिकारी सुनवाई करेंगे। इसके बाद रेलवे अधिनियम के तहत आगे की अधिग्रहण प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी। ऐसे में अधिसूचना में शामिल खसरा नंबरों के भू-स्वामियों के लिए यह चरण महत्वपूर्ण है।
चंडीगढ़-मोरिंडा रेलखंड भी होगा दोहरीकरण
चंडीगढ़-मोरिंडा रेलखंड के दोहरीकरण की दिशा में रेलवे ने कदम बढ़ा दिया है। फाइनल लोकेशन सर्वे के साथ जियोटेक्निकल जांच, मिट्टी की जांच और बोरिंग का काम शुरू किया जा रहा है।
इस रेलखंड पर दूसरी लाइन बिछने के बाद ट्रेनों के परिचालन की क्षमता बढ़ेगी। इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा उन ट्रेनों को होगा जो दिल्ली से पंजाब या जम्मू-कटरा की तरफ वाया चंडीगढ़ होकर संचालित होती हैं। मौजूदा समय में सिंगल लाइन होने के कारण कई बार विपरीत दिशा से आने वाली ट्रेनों को क्रासिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है।
