जागरण संवाददाता, अंबाला : सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड, एमआरआइ और सीटी स्कैन कराने वाले मरीजों की कोरोना जांच रिपोर्ट अनिवार्य किया जा रहा है। अगर संबंधित मरीज ने कोरोना की जांच नहीं कराइ है तो उसका पर्ची बनने के बाद चिकित्सक का परामर्श मिलते ही सैंपल लिया जाएगा। यह पहल हाल ही में पीपीपी मोड पर शुरू हुई एमआरआइ जांच करने वाली कंपनी के सुझाव पर शुरू हुई है। एमआरआइ जांच के लिए पहुंचने वाले मरीज की कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव होने पर ही जांच हो रही है।

वेंटिलेटर के लिए भी दिखानी होगी टेस्ट रिपोर्ट

सरकारी अस्पतालों वेंटीलेटर के लिए भी अब मरीज की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव होना अनिवार्य किया गया है। अगर मरीज के पास लेटेस्ट तीन दिन के भीतर की जांच रिपोर्ट निगेटिव रहेगी तो उसका इलाज तुंरत शुरू होगा। इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को दाखिल करते ही उसकी कोरोना की जांच के लिए सैंपल लिया जाएगा। वर्जन

एहतियात के तौर पर कोरोना की जांच कराने के बाद ही एमआरआइ, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। अगर कोई मरीज आपत्ति जताता है तो उसे कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जांच कराने की सलाह दी जाती है।

डा. राकेश सहल, पीएमओ छावनी।

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