दीपक बहल, अंबाला

अंबाला मंडल आयुक्त की कोठी में पुलिस कर्मियों की तैनाती और कड़ी सुरक्षा में जहां परिदा पर नहीं मार सकता, वहां पर दिन के उजाले में हरे भरे पेड़ काटने का घोटाला कई दिनों तक चलता रहा। अब यह मामला सुर्खियों में आ गया, तो स्टाफ ने सुबूतों को नष्ट करने के लिए पेड़ों की जड़ें तक उखाड़ ली। ताज्जुब की बात है कि जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आला अधिकारियों की मिलीभगत है। इस मामले में कार्रवाई करने से जिला के आला अफसर बचते दिखाई दे रहे हैं। उधर, डिफेंस इस्टेट ऑफिसर (डीईओ) द्वारा जुर्माने की कार्रवाई करना भी चुनौती बन गई है। कोठी से जड़ों तक को उखाड़ दिया गया है, जबकि पेड़ भी खुर्द बुर्द कर दिया है। ऐसे में विभाग के लिए भी मुश्किल है कि पेड़ की लंबाई और मोटाई कितनी थी और कितने पेड़ काटे गए। सुबूत नष्ट होने के बाद डीईओ कार्यालय की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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यह है मामला

कमिश्नर की कोठी में हरे पेड़ों की कटाई का मामला तूल पकड़ गया है। मामले का खुलासा तब हुआ था जब कटते हुए पेड़ का तना कमिश्नर कोठी के दूसरी ओर सड़क पर गिर गया। वहां से आने जाने वाले लोगों ने हरे पेड़ कटते दिखे, जिनमें से कुछ लोगों ने फोटो खींचे और उसकी वीडियो भी बना ली। डीईओ कार्यालय में सूचना दी गई, तो टीम पिछले गेट से कोठी में पहुंची। डीईओ कार्यालय की टीम ने मौके से ही अपने अधिकारियों को पेड़ कटने की सूचना दे दी। इसके बाद पेड़ों की जड़ों तक को उखाड़ दिया गया, ताकि पता न चल सके कितने पेड़ काटे गए हैं।

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इस तरह से है संदेह के घेरे में स्टाफ

सेना क्षेत्र में बनी अंबाला मंडल के आयुक्त की कोठी की सुरक्षा काफी कड़ी है। गेट पर ही पुलिस की गार्द तैनात है। कोई भी व्यक्ति पुलिस कर्मचारियों की इजाजत के बिना भीतर नहीं आ सकता। इसके अलावा कोठी पर अन्य स्टाफ भी मौजूद रहता है। ऐसे में कोठी के भीतर से हरे पेड़ काटना संदेह पैदा कर रहा है। माना जा रहा है कि किसी अफसर की शह पर ही यह खेल खेला गया होगा। जुर्माने की कार्रवाई बेशक डीईओ कार्यालय द्वारा की जा रही है, लेकिन स्टाफ पर कार्रवाई भी अभी तक नहीं हो पाई है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि इस घोटाले में बड़े अफसर संलिप्त हैं।

Posted By: Jagran

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