------------------- - बिना ट्रेड लाइसेंस चल रहा ट्विन सिटी में कारोबार, नींद में निगम के आयुक्त और संयुक्त आयुक्त

- केवल एप्लीकेशन फीस लेकर दी जा रही कारोबार की अनुमति, अब गुरुग्राम की तर्ज पर होगी फीस की वसूली उमेश भार्गव, अंबाला शहर

60 हजार कॉमर्शियल यूनिट लेकिन ट्रेड लाइसेंस महज 35 के पास। ट्विन सिटी की हालत कुछ ऐसी ही है। निगम बनने के सात साल बाद भी आज तक कारोबारियों के ट्रेड लाइसेंस नहीं बन सके। ट्रेड लाइसेंस बनना तो दूर की बात वर्तमान साल में अभी तक महज 400 लोगों ने ही ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए एप्लीकेशन फीस जमा कराई। यानी 59600 ने तो इस साल ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए आवेदन ही नहीं किया। यही कारण है कि नगर निगम का खजाना खाली पड़ा है। नौबत यह आन पड़ी है कि कर्मचारियों का वेतन तक देने के लिए पैसे नहीं हैं।

दरअसल वर्ष 2010 में अंबाला नगर निगम बन गया था। इसके बाद करीब 9 निगम आयुक्त और इतने ही संयुक्त आयुक्त आए और गए लेकिन किसी ने भी न तो निगम की आमदनी बढ़ाने की ओर ध्यान दिया न ही किसी ने ट्रेड लाइसेंस न लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। निगम आयुक्त और संयुक्त आयुक्त की लापरवाही के चलते ही न तो ट्रेड लाइसेंस बन सके न ही लोगों ने लाइसेंस लेना लाजमी समझा।

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लाइसेंस महज 35 अब एप्लीकेशन फीस बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू

वर्तमान में ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए 1 हजार रुपये एप्लीकेशन फीस देनी पड़ती है। इसके बाद जरूरी हिदायतों का पालन करना पड़ता है। लेकिन अब नगर निगम ने 1000 रुपये पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त एप्लीकेशन चार्ज लेने के लिए नो¨टग चला दी है। हाल ही में ट्रांसफर हुए संयुक्त आयुक्त गगनदीप ¨सह ने यह फाइल चलाई थी। इस पर उनके हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। यानी अब एप्लीकेशन फीस ही 1050 रुपये लगेगी।

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क्यों नहीं बनवा रहे कारोबारी ट्रेड लाइसेंस

दरअसल ट्रेड लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया थोड़ी जटिल है। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी लेनी है। इसके अलावा टिन नंबर, जीएसटी नंबर, आधार कार्ड, पेन कार्ड, लीज एग्रीमेंट, फायर एनओसी इत्यादि दस्तावेज जरूरी हैं। ज्यादातर कारोबारियों ने आज तक न तो दमकल विभाग न ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग किसी से भी एनओसी ही नहीं ली। सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों ने स्वेच्छा से अपने घरों में ही दुकानें बना ली। इसी तरह मंदिर, मस्जिद या सोसायटी की जगह में दुकानें खोल दी गई और निगम आयुक्त व संयुक्त आयुक्त चैन की नींद सोते रहे। ज्यादातर कॉमर्शियल दुकानों का नक्शा ही पास नहीं है। जिनका नक्शा पास है वह रिहायशी है लेकिन उनमें काम कॉमर्शियल हो रहा है।

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क्या है कार्रवाई का प्रावधान

हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 के अनुसार धारा 330 के तहत निगम एरिया में चलाए जाने वाले हर एक कामर्शियल संस्थान को ट्रेड लाइसेंस लेना होगा। धारा 331, 335 के अनुसार निगम को ट्रेड लाइसेंस न लेने वाले संस्थान को सील करने की पावर है। लेकिन आज तक किसी भी निगम आयुक्त या संयुक्त आयुक्त ने ऐसा प्रयास करना ही जरूरी नहीं समझा।

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क्या है प्रक्रिया

आवेदनकर्ता पहले एप्लीकेशन फीस जमा कराकर आवेदन करेगा।

फिर सभी ब्रांच से एनओसी देखी जाती है। एनओसी के बाद यह देखा जाता है कि संबंधित आवेदनकर्ता के पास रेंट एग्रीमेंट है या नहीं। उसका नक्शा पास है या नहीं। सभी प्रकार की एनओसी और कामर्शियल नक्शा पास होने के बाद उसे ट्रेड लाइसेंस जारी कर दिया जाता है।

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कैटागिरी का ही नहीं हो सका चयन

ट्रेड लाइसेंस जारी करने के लिए कॉमर्शियल एक्टिविटी को अलग-अलग कैटागिरी के अनुसार बांटा जाता है। लेकिन आज तक अंबाला में यही तय नहीं हो पाया कि यहां कितनी कैटागिरी का कारोबार हो रहा है। कैटागिरी के हिसाब से एप्लीकेशन फीस व शर्तें पूरी होने के बाद 60 रुपये प्रति वर्ष से लेकर 1200 रुपये प्रति वर्ष सालाना ट्रेड लाइसेंस की एप्लीकेशन अलग से फीस देनी होती है। ट्रेड लाइसेंस एक साल के लिए जारी होता है। इसे हर साल रिन्यू करवाना अनिवार्य होता है।

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ये है अधिकारियों के हालात

इस बारे में संयुक्त आयुक्त मिनाक्षी दहिया और आयुक्त जयबीर ¨सह आर्य दोनों से बातचीत करने का प्रयास किया गया लेकिन दोनों फोन उठाना लाजमी नहीं समझते। क्योंकि दोनों अधिकारियों को जनता से कोई वास्ता ही नहीं है।

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Posted By: Jagran