जागरण संवाददाता, अंबाला शहर

खाते में पैसे नहीं और किसी को चेक थमा दिया तो अब महंगा पड़ने वाला है। जो लोग अकसर कोर्ट कचहरी के चक्कर में उलझाकर सालों तक लेनदार की रकम चुकाने से बचते रहते थे उनके लिए अब ऐसा करना आसान नहीं रहेगा। अब चेक बाउंस का मामला कोर्ट पहुंचा तो फिर आरोपित को अपनी जमानत लेने के लिए 20 फीसद तक रकम कोर्ट में जमा करानी होगी जो कि शिकायतकर्ता को दी जाएगी। महत्वपूर्ण यह है कि अगर शिकायतकर्ता केस जीत जाता है और आरोपित ऊपरी अदालत में चला जाता है तो वहां भी वह सस्ते में छूटने वाला नहीं है। एक बार फिर निचली अदालत द्वारा अपने फैसले में तय की गई राशि का फीसद कोर्ट के माध्यम से शिकायतकर्ता को देना पड़ेगा। हालांकि, अगर शिकायतकर्ता केस हार जाता है तो फिर उसे ली गई रकम बैंक ब्याज के साथ वापस करनी पड़ेगी। यह नियम एक सितंबर से अमल में आ चुके हैं। फोटो- 66

चेक के नाम पर हेराफेरी कम हो जाएगी

- अधिवक्ता दिलबाग ¨सह दानीपुर के मुताबिक अब तक जो लोग रकम देने के बजाय केस में उलझाए रखते थे उनके लिए अब आसन नहीं होगा। चेक के मामले में गंभीरता बढ़ेगी। जिस व्यक्ति के खाते में रकम होगी तभी वह चेक देने की सोचेगा। फोटो- 67

सही मामलों में ही लोग चेक देंगे

अधिवक्ता सुभाष बहगल के मुताबिक अब लोग सही मामलों में ही चेक से लेन देन करेंगे। व्यापार में भरोसा बढ़ेगा। अब तक चेक से लेन देन में चेक का दुरुपयोग हो रहा था। चेक देने वाले को पता होता है कि कई साल तो कोर्ट में निकल जाएंगे लेकिन अब पैसा जमा कराना पड़ेगा तो उसे सौ बार सोचना पड़ेगा।

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फाइनेंस कंपनियां बढ़ा सकती हैं मुश्किल

- अधिवक्ता संजीव शर्मा के मुताबिक नए नियमों का फायदा फाइनेंस कंपनियां उठा सकती हैं। जो ऋण देने से पूर्व अकसर खाली चेक लेती हैं। अगर उपभोक्ता ने समय पर कर्ज नहीं चुकाया तो फिर यह खाली चेक में मनमानी राशि भरेंगी और वसूल भी कर लेंगी। फोटो- 69

न्यायालय के विवेक पर भी निर्भर करेगा

- अधिवक्ता तरूण कालड़ा के मुताबिक कोई भी निर्णय कोर्ट के विवेक पर भी निर्भर करेगा। जरूरी नहीं कि 20 फीसद जमानत से पहले लिया जाए। जमानत दी भी जा सकती है और जुर्माना कम भी लिया जा सकता है। हालांकि, इससे लोगों में भरोसा लौटेगा।

Posted By: Jagran