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चंडीगढ़-मोरिंडा 44 KM रेल मार्ग होगा डबल, जियोटेक्निकल और मिट्टी जांच का काम शुरू; ट्रेन से वैष्णो देवी जाना होगा और आसान

By Deepak BehalEdited By: Prince Sharma
Published: Wed, 23 Sep 2026 07:03 AM (IST)

चंडीगढ़-मोरिंडा 44 किलोमीटर रेलखंड के दोहरीकरण का काम शुरू हो गया है, जिससे दिल्ली से पंजाब और जम्मू-कटरा जाने वाले यात्रियों को लाभ मिलेगा।

यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है

यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है

HighLights

  1. चंडीगढ़-मोरिंडा 44 किलोमीटर रेलखंड का दोहरीकरण कार्य शुरू

  2. जियोटेक्निकल जांच और मिट्टी परीक्षण का काम जारी है

  3. दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कटरा यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ

दीपक बहल, अंबाला। दिल्ली से चंडीगढ़ होते हुए पंजाब और जम्मू-कटरा की ओर रेल सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत की उम्मीद जगी है।

अंबाला मंडल के अधीन चंडीगढ़-मोरिंडा रेलखंड अब डबल लाइन की ओर बढ़ रहा है। रेलवे ने इस महत्वपूर्ण रेलखंड के दोहरीकरण की दिशा में प्रारंभिक तकनीकी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

फाइनल लोकेशन सर्वे के साथ जियोटेक्निकल जांच, मिट्टी की जांच और बोरिंग का काम शुरू किया जा रहा है। रेलवे ने पुणे की एम/एस मोनार्क सर्वेयर्स एंड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को यह काम सौंपा है। सर्वे और मिट्टी की जांच के आधार पर आगे दूसरी लाइन के निर्माण से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

दूसरी लाइन बनने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ेगी और सिंगल लाइन के कारण ट्रेनों को क्रासिंग के लिए होने वाले इंतजार से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।

44 किलोमीटर होगी लंबाई

वर्तमान में चंडीगढ़-मोरिंडा रेलखंड सिंगल लाइन है। इसकी लंबाई करीब 44 किलोमीटर है। ऐसे में एक दिशा से ट्रेन के गुजरने के दौरान दूसरी दिशा की ट्रेन को कई बार लाइन खाली होने का इंतजार करना पड़ता है।

इसका सीधा असर ट्रेनों के परिचालन और समय-सारिणी पर पड़ता है। दोहरीकरण के बाद दोनों दिशाओं में ट्रेनों के संचालन को अधिक सुचारू बनाने की सुविधा मिलेगी।

इसका लाभ चंडीगढ़-मोरिंडा के स्थानीय यात्रियों के साथ दिल्ली से पंजाब और जम्मू-कटरा की ओर जाने वाले लंबी दूरी के यात्रियों को भी मिलने की उम्मीद है। इस मार्ग पर हर रोज आठ ट्रेनों का संचालन होता है।

इसके अलावा कुछ साप्ताहिक ट्रेनें भी चलती हैं। वाया चंडीगढ़ ट्रेनों का रूट नहीं बदलेगा मौजूदा सिंगल लाइन पर ट्रेनों का संचालन करते समय क्रासिंग की व्यवस्था करनी पड़ती है।

एक ट्रेन के गुजरने तक दूसरी ट्रेन को रोकना पड़ता है। व्यस्त समय में यह व्यवस्था परिचालन के लिए चुनौती बन जाती है। दूसरी लाइन बनने के बाद दोनों दिशाओं में ट्रेनों के लिए अलग-अलग लाइन उपलब्ध होगी।

क्रॉसिंग के लिए ट्रेनों को रोकने की जरूरत कम होगी

इससे क्रासिंग के लिए ट्रेनों को रोकने की जरूरत कम होगी और परिचालन अधिक सुगम हो सकेगा। चंडीगढ़-मोरिंडा रेलखंड के दोहरीकरण का मतलब वाया चंडीगढ़ चलने वाली ट्रेनों के रूट में बदलाव नहीं है।

दूसरी लाइन मौजूदा रेलमार्ग के साथ विकसित की जाएगी। दिल्ली से पंजाब और जम्मू-कटरा की ओर चंडीगढ़ होकर चलने वाली ट्रेनों के लिए यह मार्ग आगे भी महत्वपूर्ण बना रहेगा। दोहरीकरण का मुख्य उद्देश्य मौजूदा रेलखंड की क्षमता बढ़ाना और ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारू बनाना है।

नई ट्रेनों और अतिरिक्त फेरों की भी बनेगी संभावना अभी सिंगल लाइन की क्षमता को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की समय-सारिणी और परिचालन निर्धारित करना पड़ता है। दोहरीकरण के बाद इस परिचालन सीमा में कमी आएगी।

यात्रियों की मांग और उपलब्ध क्षमता के अनुसार भविष्य में नई ट्रेनें चलाने या मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने पर रेलवे विचार कर सकता है। हालांकि इसका अंतिम निर्णय परिचालन क्षमता, समय-सारिणी और रेलवे की जरूरतों के आधार पर लिया जाएगा।

परियोजना पूरी होने के बाद इसका असर केवल चंडीगढ़ और मोरिंडा के बीच सफर करने वाले यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा।

इस मार्ग से आगे पंजाब और जम्मू-कटरा की ओर जाने वाली ट्रेनों की क्षमता बढ़ने से यात्रियों को फायदा मिलेगा। खासकर दिल्ली से इन क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए अधिक ट्रेन विकल्प और बेहतर परिचालन की संभावना बनेगी।