अंशु शर्मा, अंबाला

बदलते समय के साथ-साथ शहर व गांव में पहनावे के अलावा युवा खुद को स्टाइलिश बनाने में लगे हुए हैं। खुद को दूसरों से अलग करने के लिए वह स्पो‌र्ट्स लुक वाली बाइकों की अपेक्षा बुलेट को पसंद कर रहे। ऐसा नहीं यह शौक केवल लड़कों तक सीमित रह गया है। आजकल की लड़कियां भी बुलेट चलाकर न केवल अपना शौक पूरा कर रही बल्कि हैरान भी कर रही हैं। शहर के अलावा ग्रामीण इलाकों के अंदर युवा भी जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। एक समय था जब भारी भरकम व महज किक मारकर स्टार्ट करने के कारण गिने चुने लोग ही इसका इस्तेमाल करते हुए दिखाई देते थे। लेकिन बुलेट बनने वाली रॉयल इनफील्ड कंपनी ने प्रतिस्पर्धा के दौर में बने रहने व युवाओं की मांग को देखते हुए सभी मॉडलों में संशोधन करते हुए उन्हें सेल्फ स्टार्ट की सुविधा देने शुरू की। तभी से इसकी डिमांड काफी बढ़ गई है।

वजन घटने के कारण युवतियां कर रही इस्तेमाल

युवतियों व कम आयु के युवाओं के लिए कंपनी द्वारा बुलेट का वजन पहले के मुताबिक घटा दिया गया है। इसकी प्रति रूझान बढ़ने का कारण एक यह भी माना जा रहा है। ताकि युवतियां भी इसे आसानी से चला लेती है। जो बुलेट पहले करीब ढाई सौ किलो की होती थी उसमें से 60 किलो वजन घटा दिया गया है। इन बुलेट के अंदर भी कई तरह से मॉडल उपलब्ध है। जिनमें से रॉयल इनफील्ड बुलेट 350, रॉयल एनफील्ड बुलेट 500, रॉयल थंडरबर्ड 350, रॉयल इनफील्ड थंडरबर्ड 500, रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350, बुलेट थंडरबर्ड ट्विन स्पार्क व बुलेट इलेक्ट्रा ट्विन स्पार्क मुख्य मॉडल है। जोकि युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

बुलेट चलाने के शौक के आगे फीकी पड़ रही कीमत

दूसरी बाइकों की अपेक्षा बुलेट की कीमत भले ही ज्यादा क्यूं ना हो। मगर बुलेट चलाने के शौक के आगे यह कीमत कुछ नहीं लग रही। यहीं कारण है कि कॉलेजों व स्कूलों के बाहर युवा बुलेट पर ही चक्कर लगाते हुए दिखाई देते हैं। बुलेट राजा फिल्म के बाद तो जहां युवाओं में बुलेट राजा बनने का शौक चढ़ गया था, वहीं युवतियां भी बुलेट चलाकर खुद को बुलेट रानी बना रही है। कच्चा बाजार निवासी सपना व अंजलि का कहना है कि ज्यादातर लड़के ही बुलेट चलाते हुए दिखाई देते हैं लड़कियां कम चलाती है। लेकिन जो मजा बुलेट चलाने में आता है वो किसी ओर में नहीं है।

Posted By: Jagran

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