जागरण संवाददाता, अंबाला शहर :

बरसात से फसल के नुकसान का जायजा लेने रविवार सुबह कृषि मंत्री जेपी दलाल गांव आनंदपुर जलबेड़ा और उगाड़ा में पहुंच गए। जहां उन्होंने दस मिनट में ही फसल के खराबे का जायजा ले लिया। अधिकारियों ने उन्हें खराब फसल दिखाने की बजाए लिक रोड से ही वह ही फसल दिखा दी, जिसकी हालत सही थी। ऐसे में पीड़ित किसानों का दर्द बाहर आना ही था। ग्रामीणों की मानें तो उन्हें बताया होता तो अपनी खराब फसल की वास्तविकता से रू-ब-रू करवाते।

कृषि मंत्री ने निरीक्षण के दौरान सबसे पहले गांव आनन्दपुर जलबेड़ा में फसलों के नुकसान के बारे में कृषि विभाग के उपनिदेशक से जाना फसलों सम्बन्धी कितने प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं। किसानों ने अपनी फसलों का बीमा करवाया हुआ है या नहीं। सरपंच ने बताया कि अधिकतर किसानों ने फसलों का बीमा करवाया हुआ है और उनके क्षेत्र में ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। उगाड़ा में भी सरपंच जसविद्र सिंह से जानकारी ली। कृषि मंत्री ने दोनों अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिस भी किसान की फसल सम्बन्धी प्रार्थना पत्र प्राप्त होता है, उसको नियमानुसार समय अवधि के तहत मुआवजा दिलवाएं। मौके पर तहसीलदार विक्रम सिगला भी मौजूद रहे।

844 किसानों ने किए आवेदन

कृषि उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने कृषि मंत्री को अवगत करवाया कि जिले में 844 किसानों के फसल खराब होने संबंधी आवेदन मिले हैं। सभी आवेदनों को प्रोजेक्ट मॉनिटरिग यूनिट पोर्टल पर अपलोड कर दिया है। किसानों की सुविधा के लिये शनिवार व रविवार को भी कार्यालय खोला गया। शनिवार को नारायणगढ़ में 21 किसानों ने और अंबाला शहर में 85 किसानों ने प्रार्थना पत्र दिये। जो प्रार्थना पत्र मिले हैं, उन किसानों की दस दिनों में फसलों की जायजा लेकर रिपोर्ट तैयार की जायेगी और मुआवजा दिलवाया जाएगा। 25 फीसद से अधिक नुकसान पर मिलेगा मुआवजा

जिला राजस्व अधिकारी कैप्टन विनोद शर्मा ने बताया कि राजस्व विभाग की ओर से 25 प्रतिशत से उपर फसलों के नुकसान की मुआवजा देने के प्रावधान है। राजस्व विभाग के मुताबिक अभी तक फसलों का अधिक नुकसान नहीं हुआ है। हकीकत यह, 50 फीसद नुकसान

जलबेहड़ा के संदीप कुमार ने बताया कि उसके तीन एकड़, राजेश कुमार के अढाई एकड़, गुरप्रीत सिंह के तीन एकड़, गुलजार सिंह के तीन एकड़ और धर्म सिंह के तीन एकड़ में 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि बरसात के पानी से उनकी फसल बर्बाद हो गई है। इससे गेहूं की बालियां सूखने लगी। ज्यादातर नवोदय स्कूल पास प्रभावित है। गेहूं को कंबाइन से काटने पडता है और दाने जमीन पर गिरेंगे, क्योंकि लेबर नहीं मिलती।

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