जागरण संवाददाता, अंबाला शहर: टीबी के मरीजों का इलाज करने वाला अस्पताल खुद बीमार होने लगा है। यहां अव्यवस्था का बोलबाला है, कलई परत दर परत खुलने लगी है। मरीजों के घर-घर जाकर दवा देने के लिए मुख्यालय से आई मोटरसाइकिलों का एक साल तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। इंश्योरेंस भी समाप्त होने लगे। जब इस मामले को दैनिक जागरण ने प्रमुखता से उठाया तो विभाग की नींद टूटी और आनन-फानन में सरकारी फीस जमा करके रजिस्ट्रेशन करा दिया गया। फिलहाल बृहस्पतिवार तक एक्स-रे रूम में खड़ी सरकारी बाइकों के नंबर प्लेट पर नंबर नहीं लिखे हैं।

टीबी से परेशान लोगों को बेहतर और सरकारी इलाज कराने के लिए शहर में टीबी अस्पताल की स्थापना हुई। स्थापना के कुछ वर्षो तक यहां पर आने मरीजों की दवा और जांच सुचारू ढंग से चली, लेकिन समय बीतने के साथ ही यह अस्पताल खुद बीमार होने लगा। यहां सरकार की ओर से सुविधाएं मुहैया कराई गई। सुविधा के रूप में अस्पताल में एक्स-रे मशीन से लेकर अन्य टीबी की बीमारी को जांचने वाली कीमती मशीने भी लगाई गई। मशीने देखरेख और रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल होने लगी। इस ओर किसी अधिकारी का ध्यान नहीं गया।

फिलहाल सरकार की ओर से टीबी के मरीजों को घर घर जाकर दवा देने से लेकर सरकारी कार्य करने के लिए एक दर्जन बाइकें भेजी गई। बाइक भेजते समय मुख्यालय की ओर से इंश्योरेंस तो करा दिया गया पर उसका पंजीकरण नहीं हुआ। बिना पंजीकरण के अंबाला पहुंची बाइकों की खेप को विभागीय लोगों ने जमकर कचूमड़ निकाला। अब तो कुछ ऐसी भी बाइक हैं जिसे चलाने के लिए पहले उसकी सर्विस करानी होगी। इन सभी बाइकों को मीडिया की नजर से छिपाने के लिए यहां के एक्स-रे रूम में खड़ा कर दिया गया है। एक्स-रे रूम में खड़ी दो बाइकों की सीट को किसी बिल्ली या कुत्ते ने फाड़ डाला है।

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वर्जन

मुख्यालय से आई मोटरसाइकिलों का रजिस्ट्रेशन करा दिया गया है। नंबर प्लेट लगाने के लिए ऑर्डर दिए गए है। जैसे ही नंबर प्लेट बनकर तैयार होगा, उसे बाइकों में फिट करा दिया जाएगा।

डॉ. पवन कुमार टीबी अस्पताल, अंबाला शहर।

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