- शहर में हर माह हो रहे करीब 300 डिलीवरी व 70 सिजेरियन, छावनी में भी लगभग पौने 300 है आंकड़ा

- डॉक्टरों की कमी होने से पैनल रेट पर बुलाने पड़ रहे प्राइवेट डॉक्टर

पवन पासी, अंबाला शहर

200 बेड के जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग में हर माह लगभग 300 डिलीवरी व 70 सिजेरियन हो रहे हैं। इन केसों के संभालने के लिए महज एक रेगुलर डॉक्टर है। एक डॉक्टर डेपुटेशन पर छावनी से बुलाई जाती हैं। यही हाल छावनी के 100 बेड अस्पताल का भी है जहां महीने में करीब पौने तीन सौ डिलीवरी होती हैं। यहां कागजों में तो दो रेगुलर डॉक्टर हैं और एक एनएचएम के अनुबंध पर है, लेकिन असलियत में रेगुलर एक ही है। एक रेगुलर डॉक्टर को शहर में डेपुटेशन पर भेजा जाता है। हालात ऐसे हैं कि स्वास्थ्य मंत्री के जिले में जननी को प्रसव पीड़ा के बीच डिलीवरी के लिए भी लंबा इंतजार झेलना पड़ रहा है। जिस दिन एक डॉक्टर छुट्टी पर चली जाती है तो पूरी व्यवस्था हिल जाती है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के (डीजी) महानिदेशक कार्यालय में तीन डॉक्टर क्लर्की कर रही हैं। जिन्हें महकमा हिलाने का नाम नहीं ले रहा है।

जिला अस्पताल में हालात में रोजाना करीब 250 ओपीडी होती हैं लेकिन ओपीडी में गाइनाक्लोजिस्ट नहीं होती बल्कि मेडिकल आफिसर(एमओ) ही गर्भवती महिलाओं की जांच व दवाई का काम कर रही होती हैं। ऐसा ही हाल छावनी का भी है।

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पैनल पर रखे प्राइवेट डॉक्टरों का लेना पड़ रहा सहारा

- शहर में जिस दिन भी किसी डॉक्टर को छुट्टी लेनी पड़ती है तो यहां फिर पैनल पर प्राइवेट डॉक्टर का भी सहारा लेना पड़ रहा है। पैनल पर रखी प्राइवेट डॉक्टर की एक डिलीवरी की फीस 3500 रुपये है और एनेस्थेटिक डॉक्टर को 2500 रुपये देने पड़ते हैं। शहर में एनेस्थेटिक भी रेगुलर रूप से एक ही है। इस मामले में छावनी अस्पताल में स्थिति बेहतर है जहां पांच एनेस्थेटिक हैं।

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ऐसे है डॉक्टरों की स्थिति

- छावनी में इस वक्त डॉक्टर हरिप्रिया गाइनी विभाग में रेगुलर डॉक्टर हैं। इनके अलावा डॉ. रजनी हैं जिन्हें शहर अस्पताल में डेपुटेशन पर भेजा जाता है। इसके बाद छावनी में एनएचएम अनुबंध पर आधारित डॉ. सुगंधा बचती हैं जिनकी मूल रूप से ड्यूटी शहर में है लेकिन उसे छावनी में लगाया हुआ है। वहीं, शहर डॉ. वीनू अरोड़ा प्रसूति विभाग की इंचार्ज एवं एकमात्र रेगुलर डॉक्टर हैं।

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महानिदेशक कार्यालय में चल रहा खेल

- स्वास्थ्य मंत्री के जिले में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं दूसरी तरफ डॉ. ज्योति कौशल, डॉ. शामली व डॉ. कल्पना त्यागी लंबे अर्से से महानिदेशक कार्यालय में क्लर्की कर रही हैं। बड़ी बात है कि इन डॉक्टरों का क्लर्क के कार्य से कोई वास्ता ही नहीं है। विभाग के सारी स्थिति संज्ञान में होने के बावजूद इन डॉक्टरों को हिलाने का नाम नहीं लिया जा रहा है।

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प्रदेश में डॉक्टरों ने ज्वाइन किया है

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के मुताबिक 555 डॉक्टरों को ज्वाइ¨नग लेटर जारी किए हैं जिसमें से 525 ने ज्वाइन कर लिया है जिसमें गाइनी की डॉक्टर भी हैं। जिन डॉक्टरों ने ज्वाइन नहीं किया है उन्हें ज्वाइन के लिए नोटिस दिया गया है।

Posted By: Jagran