संवाद सहयोगी, नारायणगढ़

राज्यमंत्री नायब ¨सह सैनी के गृहक्षेत्र में अवैध खनन का खेल चलता रहा और अधिकारी नींद में डूबे रहे। करीब एक साल पहले जिन स्क्री¨नग प्लांटों को सील किया गया उनमें भी यह धंधा फलता-फूलता रहा। किसी ने इन पर कार्रवाई करने की नहीं सोची। इस तरह न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान बल्कि पर्यावरण प्रदूषण भी होता रहा। न जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान दिया न ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने। शुक्रवार को विभाग की नींद टूटी और 13 ऐसे स्क्री¨नग प्लांटों को दोबारा से सील किया गया जिन्हें दो जून 2017 को सील किया गया था। इस कार्रवाई के लिए कुल पांच टीमों का गठन किया गया था। री-सी¨लग की इस कार्रवाई में प्रदूषण नियंत्रण विभाग के पसीने छूट गए। यही कारण रहा कि दोपहर 12 बजे से रात नौ बजे तक केवल 13 पर ही कार्रवाई हुई। विभाग ने अब 49 अन्य स्क्री¨नग प्लांटों की सूची तैयार की है जिनमें यह काम चल रहा है। हालांकि अभी यह देखा जाएगा कि इनमें से कितने सही हैं और कितने गैरकानूनी तरीके से चल रहे हैं।

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ज्यादातर भागने में हुए कामयाब, अभी भी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति

शुक्रवार को बेशक 13 प्लांट री-सील हुए लेकिन इस कार्रवाई से पूर्व ही ज्यादातर प्लांट संचालक अपने-अपने प्लांटों को बंद कर भागने में कामयाब रहे। ऐसे में माना जा रहा है कि कार्रवाई की पूर्व ही सूचना इन प्लांट संचालकों को लग चुकी थी। ऐसे में यह कार्रवाई अभी भी खानापूर्ति तक ही सिमट गई। हालांकि विभाग की इस कार्रवाई से दिनभर प्लांट संचालकों में हड़कंप मचा रहा। बता दें कि सरकारी आदेशों के मुताबिक नदी में किसी भी तरह के खनन पर एक जुलाई से लेकर 30 सितंबर तक के तीन महीने के समय के लिए पूर्णत: रोक लगाई जाती है। लेकिन अंबाला में बे-रोक टोक लगातार यह धंधा चल रहा था।

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करीब छह माह पूर्व सस्पेंड कर दिया गया था ठेका

नारायणगढ़ जोन में खनन का ठेका लेने वाली कंपनी का अनुबंध करीब छह माह पूर्व सस्पेंड कर दिया गया था। क्योंकि कंपनी ने प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित फीस जमा नहीं कराई थी। बावजूद इसके खनन माफिया बरसाती सीजन में क्षेत्र की नदी-नालों से धड़ल्ले से खनन कर रहा था।

खनन माफिया के हौसले क्षेत्र में इतने बुलंद थे कि ये माफिया बिना एनओसी के बड़े पैमाने पर स्क्री¨नग प्लांट भी चला रहे थे।

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पूर्व में तीन स्क्री¨नग प्लांट किए थे सील लेकिन उनमें भी चल रहा था धंधा

दैनिक जागरण द्वारा इस मामले में लगातार समाचार प्रकाशित किए गए। इन पर संज्ञान लेते हुए प्रदूषण विभाग द्वारा पूर्व में भी लगभग 30 स्क्री¨नग प्लांट सील किए थे। लेकिन इन प्लांट संचालकों ने भी खुद ही सी¨लग खोलकर दोबारा प्लांट चला लिए और विभाग के अधिकारी चैन की नींद सोते रहे।

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क्षेत्र में चल रहे हैं लगभग चार दर्जन प्लांट :-

बता दें कि नारायणगढ़ जोन में लगभग चार दर्जन स्क्री¨नग प्लांट चल रहे हैं, जिनमें से अधिकतर के पास न तो कोई एनओसी है और न ही कोई लाइसेंस। राजनैतिक संरक्षण के साए में क्षेत्र के नदी-नालों को अवैध तौर पर चीर रहे इन प्लांट संचालकों ने न केवल प्राकृतिक संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया अपितु क्षेत्र की सड़कों पर इन प्लांटों की गाडिय़ा आम आदमी के लिए मौत बनकर घूम रही हैं।

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कई गांव में है स्क्री¨नग प्लांट:-

नारायणगढ़ जोन में मारकंडा, सुकरों, रूण, बेगना, ओमला आदि नदियां होकर गुजरती हैं, इन नदियों के किनारे बसे गांव हमीदपुर, डेरा, शाहपुर, टोका, मियांपुर, टपरियों, कोहड़ा भूरा आदि लगभग एक दर्जन गांवों में बड़े पैमाने पर स्क्री¨नग प्लांट स्थापित हैं, जो चोरी-छिपे अवैध खनन को धडल्ले से अंजाम दे रहे हैं।

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इन स्क्री¨नग प्लांटों को वर्ष 2017 में सील करने के जारी हुए थे आदेश

एमएस ग्रेवाल एंटरप्राइजेज, स्क्री¨नग प्लांट, गांव-शाहपुर।

-पंजोरी स्क्री¨नग प्लांट, गांव-टोका।

-जीपीएल स्क्री¨नग प्लांट, गांव-शाहपुर।

-जय मां भगवती स्क्री¨नग प्लांट, गांव-टोका।

-गणेश स्क्री¨नग प्लांट, गांव-डेरा।

-जय अंबे स्क्री¨नग प्लांट, गांव-डेरा।

-उप्पल स्क्री¨नग प्लांट, गांव-डेरा।

-युवराज स्क्री¨नग प्लांट, गांव-डेरा।

-साई स्क्री¨नग प्लांट, गांव-डेरा।

-भारत स्टोन स्क्री¨नग प्लांट, गांव-शाहपुर।

-चड्डा स्क्री¨नग प्लांट, गांव-डेरा।

-मोहित शर्मा स्क्री¨नग प्लांट, गांव-टोका।

-श्री राधे राधे स्क्री¨नग प्लांट, गांव-टपरियां।

- केएस स्क्री¨नग प्लांट, गांव-डेरा।

- श्री राम ग्रैवल्स स्क्री¨नग प्लांट, गांव-शाहपुर।

-प्रधान स्क्री¨नग प्लांट, गांव-टोका।

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कुल पांच टीमों ने दो दर्जन से ज्यादा प्लांटों को सील किया है। कुल 59 प्लांट चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर बंद पाए गए थे।

-विपिन कुमार, एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण विभाग।

Posted By: Jagran