जागरण संवाददाता, अंबाला शहर

सालभर बिजली बिल की समस्याओं के लिए जनता चक्कर काटती रही। बिजली निगम ने किसी को लाखों रुपये बिल थमाए तो ज्यादातर लोगों के घर कई-कई माह बिजली के बिल ही नहीं भेजे। अलबत्ता साल भर जनता बिल ठीक करवाने से लेकर बिल लेने के लिए बिजली निगम के धक्के खाती रही। बिना री¨डग लिए लोगों के घर बिजली के बिल पहुंचाए गए साथ ही ठीक करने के नाम पर जनता को दर-दर की ठोकरें खिलाई गई। एसई कार्यालय में हर माह जनता दरबार लगे और जनता बिलों को लेकर दुखड़ा रोती रही। साल के अंत में करीब 27 हजार लोगों ने बिल एवं माफी योजना का लाभ उठाया और 15 करोड़ रुपये के बिल माफ करवाए।

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जब मजदूर का आया 7 लाख से ज्यादा बिल

बराड़ा में मजदूर दीप चंद के घर बिजली बिल 7 लाख 74 हजार रुपये पहुंचा तो परिवार सहम गया। वार्ड 8 निवासी दीपचंद ने हर बिल को नियमित रूप से भर रहा था। उसका कोई भी पिछला बिल बकाया नहीं है। अप्रैल में उसका बिजली का बिल 1160 रुपये आया था। जिसमें उसके मीटर की 229 यूनिट बिजली खर्च हुई थी पीड़ित ने बताया कि निगम की ओर से उसे भेजे गए बिजली के बिल में नई यूनिट री¨डग 13 हजार 374 थी तो पुरानी री¨डग 13080 थी जो कुल यूनिट 294 बनती है। लेकिन विभाग ने उसे 1 लाख 294 यूनिट का बिल भेजा है।

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बुजुर्ग महिला के बिल देख लगा सदमा

महेश नगर 508 ए मकान में रहने वाली बुजुर्ग करतार कौर के घर जब बिजली निगम ने 77 लाख रुपये बिजली का बिल भेजा तो वह सदमे में आ गई। चंडीगढ़ में रहने वाले बेटे हर¨जद्र ¨सह को जब पता चला तो वह आनन-फानन में घर पर आ गया। मां का प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। चंडीगढ़ में रहने वाला उसका बेटा जब एसडीओ से मिला तो बब्याल एसडीओ ने हर¨जद्र ¨सह को जेई के पास भेज दिया। जहां से उसे आगे दूसरे पर भेज दिया गया। 3 अगस्त को उसकी मां के मोबाइल नंबर पर बब्याल सब डिवीजन की ओर से बिल जनरेट होने का मैसेज आया। मैसेज में 9 लाख 99 हजार 632 यूनिट की खपत का बिजली का बिल 77 लाख 11 हजार 313 रुपये की जानकारी थी जिसे पढ़ते ही उसकी मां का बीपी हाई हो गया।

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इस साल भी नहीं लगा मीटर

डेरा काला अम्ब के शमशेर ¨सह पिछले 11 साल मीटर लगवाने के लिए जूझता रहा। इस साल भी उसका मीटर नहीं लगा था। मीटर लगवाने के लिए उसने सिक्योरिटी भी भरी लेकिन मीटर नहीं लगा। हालांकि बिना बिजली फूंके परिवार के पास बिजली बिल जरूर पहुंच रहा। डेरा कालाअम्ब के शमशेर ¨सह की टेल¨रग की दुकान है, उसी में बिजली मीटर लगवाना था। 8 अगस्त 2005 को उसमें बिजली मीटर लगवाने के लिए 1415 रुपये सिक्योरिटी भर दिए थे। इसके बाद उनके पास 2006 के अंतिम माह में बिजली बिल आ गया। जिसे देखकर परिवार हैरान रह गया। मामले को लेकर उन्होंने 2007 में जेई, एसडीओ से लेकर एक्सईएन तक गुहार लगाई। लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि फिर 23 मई 2016 में राज्यमंत्री ने बिजली बोर्ड में खुला दरबार लगाया। इसमें बिजली के तकरीबन सभी अधिकारी मौजूद थे। इस पर राज्यमंत्री ने निगम अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई थी।

Posted By: Jagran

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