जागरण संवाददाता, अंबाला शहर : स्वामी सच्चिदानन्द गिरी महाराज की अध्यक्षता में जैन कॉलेज रोड पर स्थित महाकाली मंदिर में आप और हम सेवा मंडल द्वारा श्रीमद्भागवत कथा हुई। सन्त गोपीराम महाराज ने भागवत के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पाण्डवों को पूर्ण विश्वास था परमात्मा में। पाण्डव स्वतन्त्र नहीं थे मगर प्रभु के आधीन थे। उन्हें बिना मांगे ही सब कुछ मिल गया। भीष्म पितामह को श्रीकृष्ण में पूर्ण श्रद्धा थी तभी उन्हें अंतिम समय में भगवान के दर्शन हुए। सन्त गोपीराम ने कहा कि प्रभु कृपा से ही सद्गुरु मिलते हैं। आज गुरु शिष्य परम्परा अत्यन्त बिगड़ चुकी है। गुरु अपने शिष्य के धन का हरण कर रहे हैं। शिष्यों की संख्या बढ़ाने की गुरुओं में होड़ लगी हुई है। गुरु शिष्य परम्परा के बचने पर ही हमारी संस्कृति बचेगी। उन्होंने कहा कि विदुर की अगाध भक्ति के कारण ही श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के शाही भोजन को त्याग कर साधारण भोजन किया। भगवान को अहंकार पसन्द नहीं, वो क्षण में उसे उखाड़ फेंकते हैं। अहंकार के कारण ही राजा दक्ष को बकरे का सिर लगा। कर्दम ऋषि और देवहूति की तपश्चा और आतुरता के कारण प्रभु उनके यहां पुत्र रूप में आए। प्रभु भक्ता सुनीति के यहां ध्रुव जैसा पुत्र पैदा हुआ जिसने अल्पायु में ही प्रभु की गोद प्राप्त कर ली। माता अनुसुईया को नारी जाति का आभूषण बताते हुए नारी जाति का गौरव है। पतिव्रता और धर्मपरायणता के कारण उन्होंने ब्रह्म, विष्णु, महेश को छह-छह मास का शिशु बना दिया। 21 फरवरी को कृष्ण जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम व श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा।

Posted By: Jagran

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