संवाद सहयोगी, बराड़ा

दादूपुर नलवी नहर के पीड़ित किसानों द्वारा सीएम विडो पर दी शिकायत के बाद जांच के लिए सिचाई विभाग भी सक्रिय हो गया है। सिचाई विभाग हरियाणा के कार्यकारी अभियंता कार्यालय से बृहस्पतिवार को अधिकारी कमल कांत ने कस्बा में पहुंचकर पीड़ित किसानों की व्यथा को सुना।

पीड़ित किसानों ने शिकायत में मुख्यमंत्री को बताया था कि नहर के निर्माण से उनकी भूमि दो भागों में बांट होने, नहर के किनारे खड़े बड़े-बड़े पेड़ों से फसलों का विकास अवरुद्ध होने के साथ-साथ बाढ़ ठेका राशि न मिलने सहित कर्ज में डूबने के कारण वह लोग भूखों मरने की कगार पर है। सरकार द्वारा नाममात्र की दी गई मुआवजा राशि को भी वह लौटा पाने में असमर्थ हैं। अत: उनकी भूमि बिना मूल व ब्याज राशि के लौटाई जाए।

सिचाई विभाग के अधिकारी ने किसानों को समझाने का प्रयास किया कि सरकार काफी समय पहले ही नहर को डिनोटिफाइड करके किसानों से मुआवजा राशि प्रतिशत ब्याज सहित वापस लेने का निर्णय कर चुकी है। इसकी अधिसूचना सिचाई विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव हरियाणा सरकार द्वारा जारी की जा चुकी है। यदि किसान अधिसूचना के अनुसार सहमत हों तो सरकार किसी भी प्रकार का दावा नहीं करने वाले किसानों का प्रतिशत ब्याज माफी पर विचार कर सकती है।

पीड़ित किसानों ने कहा कि डिनोटिफाइड करना मुआवजा राशि से इंकार न्यायालय की अवमानना, किसान विरोधी व सरासर अन्यायपूर्ण कार्रवाई है। किसानों को अनुबंध के अनुसार ब्याज सहित ठेका राशि फसलों के नुकसान की भरपाई कर के बिना मूल तथा ब्याज के कर्ज में डूबे किसानों को आत्महत्या से बचाने के लिए भूमि वापस लौटाई जाए।

Posted By: Jagran

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