अवतार चहल, अंबाला शहर

गांव सुल्लर में मंदिर और गुरुद्वारा की कमेटियां मिसाल बन रही हैं, जो लोगों को कौमी एकता का संदेश दे रही हैं। दोनों कमेटियां एक-दूसरे के सहयोग में हमेशा तत्पर रहती हैं। गांव में मंदिर की कमेटी प्रवेश द्वार बना रही थी। इसमें आर्थिक दिक्कत आई तो गुरुद्वारा की कमेटी ने हाथ बढ़ाया और बतौर चंदा 21 हजार रुपये की राशि दी।

बता दें कि अंबाला शहर से दस किलोमीटर की दूरी पर गांव सुल्लर में करीबन डेढ़ सौ साल पुराना मंदिर है। इसी तरह गुरुद्वारा कंघा साहिब भी ऐतिहासिक है। क्योंकि यहां पर दशम गुरु गोबिद सिंह जी ने अपने बालों को कंघा किया था। होली फाग पर होता है कुश्ती दंगल

मंदिर में काफी पुराना शिव मंदिर में है। जिसमें होली फाग के मौके पर कुश्ती दंगल करवाया जाता है। इसके अलावा मंदिर में शिवरात्रि के मौके पर भी भंडारा लगाया जता है। इसी तरह गुरुद्वारा में भी हर माह सक्रांति, पूर्णमासी के अलावा सभी गुरुओं के प्रकाशोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है। यहां ग्रामीणों दोनों जगहों पर मिल-जुलकर धार्मिक कार्यक्रमों में सेवा भाव से काम करते हैं। ढ़ाई लाख रुपये की राशि से बन रहा गेट

गांव सुल्लर में मंदिर कमेटी की ओर से प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है। इसमें अभी तक करीबन डेढ़ लाख रुपये खर्च हो चुका है। अभी काम जारी है। गेट को पूरा करने में करीबन एक लाख रुपये और खर्च होने का अनुमान है। दोनों धार्मिक स्थलों में तालाब का फासला

श्री प्राचीन शिव मंदिर सुल्लर के प्रधान हरविद्र सिंह, जसवीर सिंह और गुरुद्वारा प्रधान जसपाल सिंह ने बताया कि मंदिर और गुरुद्वारा में महज आधा एकड़ का फासला है, जिसमें तालाब है। लेकिन ग्रामीणों के दिलों में कोई फासला नहीं है। ग्रामीण दोनों जगहों पर काफी संख्या में पहुंचते हैं और मन्नत मांगते आते हैं।

Posted By: Jagran

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