राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। सरकारी काम में बाधा पहुंचाने व नगरपालिका की फाइलों को नष्ट करने के मामले में बनासकांठा की स्थानीय अदालत ने गुरुवार को डीसा के भाजपा विधायक शशिकांत पांड्या को तीन माह कारावास व 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि, शीघ्र ही विधायक को जमानत भी दे दी गई।

मामला 25 साल पुराना है। वर्ष 1994 में श्रीप्रकाश भारतीय डीसा नगरपालिका के चेयरमैन थे। तब शशिकांत पांड्या ने चीफ ऑफिसर गंगाराम सोलंकी व सुप्रिंटेंडेंट के काम में बाधा पहुंचाते हुए कार्यालय में रखी फाइलों को नष्ट कर दिया था। शशिकांत पांड्या के खिलाफ आइपीसी की धारा 327, 477, 186 तथा 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

डीसा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एमडी ब्रह्मभट्ट ने सरकारी वकील की दलीलों को स्वीकार करते हुए गुरुवार को भाजपा विधायक शशिकांत पांड्या को इस मामले में तीन माह कारावास व 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर 15 दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

विधायक शशिकांत पांड्या ने बताया कि यह उस समय का मामला है, जब कांग्रेस सत्ता में थी। वे नेता विपक्ष के नाते जनसमस्या हल करने के लिए अर्जी देने गए थे। जनता से जुड़े मुद्दों पर वह आक्रामक थे। इसलिए, चीफ ऑफिसर ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शशिकांत पांड्या के आग्रह पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सजा सुनाने के कुछ समय बाद ही जमानत दे दी। अब यह मामला भी गरमा सकता है। 

गौरतलब है कि इससे पहले गुजरात में हत्या के एक मामले में भाजपा विधायक जयराज सिंह जडेजा को भी सजा सुनाई जा चुकी है। तब जमीन विवाद को लेकर दो गुटों के लोग आपस में भिड़ गए थे। इसके बाद यह मामला काफी गरमा गया था। तब जाकर पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाई और आखिरकार भाजपा विधायक जयराज सिंह जडेजा सुनाई गई। 

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