अहमदाबाद, जेएनएन। गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री डॉ मायाबेन कोडनानी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एसआईटी ने विशेष अदालत के समक्ष दिए बयान में कहा है कि नरोडा गाम दंगे के दौरान मायाबेन घटनास्थल पर मौजूद थीं। वह आईं, भीड़ के सामने भाषण देकर उनको उकसाकर चली गईं। नरोडा पाटिया केस में कोडनानी को 28 साल की सजा हुई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें इसी वर्ष बरी कर दिया था।

गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में 59 कारसेवकों को जिंदा जलाने के बाद राज्य में भड़के दंगों के दौरान अहमदाबाद के नरोडा गाम में हिंसक भीड़ ने 11 लोगों की हत्या कर दी थी। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम एसआईटी की ओर से विशेष लोकअभियोजक गौरांग व्यास ने विशेष न्यायाधीश एमके दवे के समक्ष कहा कि 28 फरवरी, 2002 को सुबह नौ बजे भाजपा की तत्कालीन विधायक डॉ मायाबेन कोडनानी नरोडा गाम में मौजूद थीं, वह अपनी कार से वहां आईं, भीड़ को भाषण देकर उकसाया और चली गईं।

मायाबेन के बचाव में भाजपा नेता व एक डॉक्टर व मरीज के बयानों पर व्यास ने कहा कि डॉ मायाबेन को बचाने के लिए यह गवाही दी गई है। उनका दावा है कि मायाबेन सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर विधानसभा में मौजूद थीं, जबकि सोला अस्पताल दोपहर 1 बजे पहुंची थी। एक डॉक्टर व गर्भवती महिला ने मायाबेन के इसी समय अपने नरोडा स्थित क्लिनिक में होने का दावा किया, लेकिन व्यास ने उनके बयान को यह कहते हुए नकार दिया कि इस संबंध में कोई दस्तावेज व बिल पेश नहीं किए गए। इस मामले में अगली सुनवाई आगामी सोमवार को होगी, जिसमें एक पत्रकार के स्टिंग ऑपरेशन की सीडी व क्राइम सीन के वीडियो भी न्यायाधीश देखेंगे।

उल्लेखनीय है कि डॉ कोडनानी को नरोडा पाटिया केस में विशेष अदालत ने 28 साल की सजा सुनाई थी। कुछ साल जेल में रहने के बाद अप्रैल 2018 में हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था, लेकिन सरकारी वकील के दावे से नरोडा गांव मामले में डॉ मायाबेन फंस सकती हैं। उच्च्तम न्यायालय ने गुजरात के 11 दंगा मामलों के लिए विशेष अदालत का गठन किया था, नरोडा गाम मामला भी उनमें से एक है।  

Posted By: Sachin Mishra