अहमदाबाद, जागरण संवाददाता। पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, मंदिरों की मुक्ति तथा सदियों पहले हिंदू से मुस्लिम बने परिवारों की घर वापसी जैसे मुद्दों पर विचार के लिए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गुजरात में सम्मेलन बुलाया है। विहिप ने भारत की यात्रा पर आ रहे पोप से 350 साल तक हिंदुओं पर ईसाइयों के अत्याचार पर माफी मांगने के साथ भारत में मतांतरण नहीं कराने के एलान की भी मांग की है। गुजरात के जूनागढ़ में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति के सदस्य तथा हिंदू समाज की विविध संस्थाओं के विचारक और धर्मगुरु शामिल होंगे। शुक्रवार को पहले दिन विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि विहिप संतों के मार्गदर्शन पर काम करती है।

सम्मेलन में इन मुद्दों पर हुई चर्चा

तीन दिन के इस सम्मेलन में हम अपने संकल्पों का स्मरण करेंगे। धर्म प्रसार, बजरंग दल, दुर्गावाहिनी के कार्य पर विचार किया जाएगा। कुछ पीढ़ियों पहले जो हिंदू से मुसलमान बन गए, उनकी घर वापसी का अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतांतरण के बाद व्यक्ति धर्म, परंपरा व देवी-देवता को छोड़ देता है। इसलिए उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। साधु समाज के अध्यक्ष मुक्तानंद महाराज ने कहा कि भारत में किसी तरह का विवाद ना रहे, वह विश्व का गुरु बनकर उसका मार्गदर्शन करे। देश आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध व सुखी बने। विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने देश में बिगड़ते पर्यावरण के संरक्षण, मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण से मुक्ति, मतांतरण के खिलाफ कठोर कानून बनाने जैसे मुद्दों पर बल दिया। 2024 में विहिप 60 साल पूरे कर रही है। इसके विस्तार पर भी मंथन किया जा रहा है। सम्मेलन में विहिप अध्यक्ष डा आरएन सिंह समेत जर्मनी, थाइलैंड, बांग्लादेश, नेपाल के पदाधिकारी शिरकत कर रहे हैं।

गौरतलब है कि गत दिनों कोलकाता में विहिप के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने मतांतरण के खिलाफ देश में एक मजबूत और सशक्त कानून बनाने की जरूरत पर बल दिया था, ताकि लोगों को जबरन या धोखे से धर्म बदलने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद मतांतरण के खिलाफ 31 दिसंबर तक पूरे देश में धर्म रक्षा अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत मतांतरण कराने वालों की साजिशों को उजागर किया जाएगा।

Edited By: Sachin Kumar Mishra