अहमदाबाद, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी के दौरान दवाओं से लेकर इंजेक्‍शन आदि की कालाबाजारी के बीच कोरोना के उपचार में कारगर टोसिलीजुमेब का टीका सूरत में पौने तीन लाख रुपये में बेचा गया। पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है तथा एक नर्स की तलाश है। बाजार में इस टीके की कीमत 40 हजार के करीब है। सूरत पुलिस को शहर में कोरोना के गंभीर मरीजों को लगाए जाने वाले टोसिलीजुमेब टीके की कालाबाजारी की जानकारी मिली। इसके बाद स्‍पेशल ऑपरेशन ग्रुप एसओजी की एक टीम ने शहर के ट्राय स्‍टार अस्‍पताल में कार्यरत नर्स हेतल कथीरिया से संपर्क किया। उमरा पुलिस थाना के पुलिस निरीक्षक केबी झाला ने बताया कि कथीरिया ने वॉट्सएप पर अपने पिता रसिक कथीरिया का नंबर देकर उनसे संपर्क करने को कहा। जब पुलिस के डमी ग्राहक ने रसिक भाई से इस इंजेक्‍शन की व्‍यवस्‍था करने को कहा तो उसने पहले तीन लाख रुपये मांगे, लेकिन बाद में दो लाख 70 हजार रुपये में देने को तैयार हो गया।

डमी ग्राहक को उसने नजदीक के एक पेट्रोल पंप के पास बुलाकर वहां टोसिलीजुमेब इंजेक्‍शन देकर जब दो लाख 70 हजार रुपये लिए तो पहले से वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया। पूछताछ में रसिक ने बताया कि वह यह इंजेक्‍शन जियोमेक्‍स अस्‍पताल के बिलिंग काउंटर पर काम करने वाले ब्रजेश मेहता से लाकर देता है। पुलिस ने ब्रजेश की भी धरपकड़ कर ली है, लेकिन नर्स हेतल अभी फरार है। बाजार में इस टीके की कीमत करीब 40 हजार है, लेकिन काला बाजार में इसे दो से तीन लाख रुपये तक में बेचा जा रहा है। पुलिस को इंजेक्‍शन के असली होने पर भी शक है, इसलिए उसे जांच के लिए फूड एंड ड्रग्स विभाग की लैब में भेजा गया है। गौरतलब है कि गुजरात पुलिस ने नकली इंजेक्‍शन व कालाबाजारियों पर शिकंजा कसने के लिए गत दिनों ही करीब दो दर्जन मामले दर्ज कर 60 से अधिक लोगों की धरपकड़ की थी। 

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