अहमदाबाद, प्रेट्र। गुजरात हाई कोर्ट ने आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं की याचिका स्वीकार कर ली है। याचिका में दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनवाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी गई है।जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस वीरेश मेवाणी की पीठ ने याचिका दाखिल करने में विलंब को दरकिनार करते हुए उसे स्वीकार कर लिया। साईं को सूरत के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने दुष्कर्म, अप्राकृतिक अपराध, मारपीट, अपराधिक धमकी व षड्यंत्र के मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

एक महिला ने आरोप लगाया था कि जब वह वर्ष 2002 से 2005 के बीच आसाराम के सूरत स्थित आश्रम में रहती थी, तब साईं ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। साईं को 3 दिसंबर 2013 को दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि सूरत के जहांगीरपुरा में 17-18 वर्ष पूर्व आसाराम आश्रम में सत्संग में आई सूरत की दो बहनों ने नारायण साई के खिलाफ 2013 में दुष्कर्म की शिकायत दर्ज करवाई थी। इस मामले में सूरत की सत्र न्यायालय ने नारायण साई को दुष्कर्म के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी आरोप में साधिका गंगा-जमना तथा साधक कौशल ठाकुर उर्फ हनुमान को 10 वर्ष का कारावास तथा जुर्माना की सजा मिली। नारायण साई को आजीवन कारावास की सजा के मद्देनजर लाजपोर सेंट्रल जेल के बैरेक नंबर सी-6 में रखा गया है। 

इन्हें भी मिली सजा

धर्मिष्ठा उर्फ गंगा और भावना उर्फ जमुना : साई की सहयोगी। 10 साल की कैद। साजिश में हिस्सेदार बनने व गैरकानूनी रूप से पीड़िता को बंधक बनाने और साई के कहने पर उसकी पिटाई करने का दोषी।

पवन उर्फ हनुमान : साई का सहयोगी। 10 साल की कैद। साजिश में हिस्सेदार बनने का दोषी।

राजकुमार उर्फ रमेश मल्होत्रा : साई का ड्राइवर। छह माह की कैद। आइपीसी की धारा 212 (अपराधी को संरक्षण देना) के तहत दोषी।

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Posted By: Babita kashyap

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