अहमदाबाद, जागरण संवाददाता। गुजरात में पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। कांग्रेस ने तीन हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव में ओबीसी वर्ग का आरक्षण समाप्त कर उन्‍हें सामान्य सीट घोषित करने के राज्य चुनाव आयोग के फैसले के लिए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उधर कानून मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी का कहना है कि चुनाव आयोग का फैसला राज्य सरकार को मान्य है।

राज्य चुनाव आयुक्त संजय प्रसाद की ओर से जारी एक परिपत्र में कहा गया है कि राज्य की 3252 ग्राम पंचायत के चुनावों में अन्य पिछडा वर्ग के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं होगी। पूर्व में जिन सीटों को ओबीसी के लिए आरक्षित किया गया था अब उनको सामान्य सीट मानकर चुनाव कराए जाएंगे।

कांग्रेस विधायक पूंजाजी वंश ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले 10 फीसदी आरक्षण को समाप्त किए जाने को संविधान विरोधी बताते हुए इसमें सुधार की मांग की है। वंश का कहना है कि यह पिछड़ा वर्ग के साथ अन्याय है, भाजपा इस तरह आरक्षण व्यवस्था को ही खत्म करना चाहती है।

राज्य के कानून मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी का कहना है कि आयोग उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर काम कर रहा है, वह कानून का पालन कर रहा है, उसका निर्णय सरकार को मान्य है।

ओबीसी नेता एवं पूर्व विधायक अल्पेश ठाकोर ने आयोग के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसमें सुधार की मांग की है। अल्पेश का कहना है कि पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए लेकिन प्रशासनिक भूल के कारण उनका 10 फीसदी आरक्षण भी समाप्त किया जा रहा है।

भाजपा के ही युवा पाटीदार नेता वरुण पटेल ने आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को भी पंचायत चुनाव में आरक्षण की मांग की है। उनका कहना है जब सभी वर्ग को चुनाव में आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को क्यों वंचित रखा जाए। राज्य में पंचायत चुनाव करीब 8 माह पहले टल गये थे, सरकार ने इनमें प्रशासक नियुक्त किया था लेकिन आयोग के परिपत्र को लेकर फिर चुनाव का पेंच फंस गया है।

उच्चतम न्यायालय ने 2010 के अपने आदेश में सभी वर्गो का सर्वेक्षण कर उनकी आबादी के अनुसार स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण देने का आदेश जारी किया लेकिन मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सरकार के अलावा किसी भी राज्य ने उसका पालन नहीं किया। कमिशन का गठन नहीं करना, गुजरात सरकार की गंभीर लापरवाही है।

के जी वणजारा

गुजरात सामाजिक न्याय विभाग के पूर्व सचिव

Edited By: Babita Kashyap