बनास की धरती पर हर साल तैयार होंगे बेहतर नस्ल के 25 हजार बछडे़, प्रधानमंत्री 30 को भिलडी में पशु संवर्धन केंद्र का करेंगे लोकार्पण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को बनास डेयरी के पांच बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे, जिसमें भिलडी में 325 ...और पढ़ें

पीएम मोदी बनास डेयरी के 5 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे
HighLights
पीएम मोदी 30 अक्टूबर को बनास डेयरी के 5 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे
भिलडी में 325 करोड़ का आधुनिक पशु संवर्धन केंद्र स्थापित।
गोबर आधारित बायो-सीएनजी प्लांट ग्रामीण आय और हरित ऊर्जा को बढ़ावा।
शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 30 अक्टूबर को बनास डेयरी के पांच बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इनमें बनासकांठा के भिलडी में देशी गौवंश व भैंसों के संवर्धन के लिए 325 करोड़ की लागत से तैयार केंद्र, पालनपुर वेयर हाउस शामिल है।
बनासकांठा में ही गोबर आधारित चार बायो सीएनजी प्लांट संचालित हैं तथा जिले में 200 व देश में एक हजार प्लांट बनाने के लक्ष्य हैं। विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी एवं उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी प्रधानमंत्री की सभा की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे।
उत्तर गुजरात के बनासकांठा में बनास डेयरी की ओर से गांव व गौवंश आधारित क्रांति की नई गाथा लिखी जा रही है। राष्ट्रीय डेयरी डवलपमेंट बोर्ड के मार्गदर्शन तथा राष्ट्रीय गोकुल मिशन की मदद से करीब 325 करोड़ की लागत से भिलडी गांव में देशी गौवंश के संवर्धन के लिए आधुनिक केंद्र की स्थापना की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 30 नवंबर को इसका लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही चार अन्य विकास कार्यों का उद्घाटन एवं लोकार्पण करेंगे। गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी एवं उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी प्रधानमंत्री की सभा की तैयारियों का जायजा लेने भिलडी पहुंचे।
चौधरी ने बताया कि गांव भारत के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार हैं, भिलडी में बनाए गये आधुनिक तकनीक से युक्त भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर की मदद से प्रतिवर्ष उत्तम नस्ल के 25 हजार बछडों को तैयार किया जा सकेगा। अब बनास की धरती पर कांकरेज, गीर, साहीवाल, थारपारकर, मेहसाणी, बन्नी, जाफराबादी एवं मुर्राह जैसी नस्ल के गाय व भैंस के बछडे तैयार किये जा सकेंगे।
चौधरी ने बताया कि बनास डेयरी की ओर से यहां गोबर आधारित चार बायो सीएनजी प्लांट संचालित हैं। जहां प्रतिदिन 340 टन गोबर को प्रोसेस कर बायो सीएनजी तैयार किया जाता है।गोबर से बनने वाला बायो-सीएनजी सामान्य सीएनजी से कम दाम में उपलब्ध है।
सामान्य कचरा माने जाने वाले गोबर को वाहनों के लिए स्वच्छ हरित ईंधन उत्कृष्ट जैविक खाद और पशुपालक परिवारों के लिए पखवाड़े की नियमित नकद आय के स्रोत में बदलकर संस्था ने एक क्रांतिकारी पहल की है।
बनासकांठा जिले में लगभग 28 लाख पशुधन में से 24 लाख पशु बनास डेयरी से जुड़े पशुपालकों के पास हैं।
यहां प्रतिदिन करीब 24,000 टन गोबर पैदा होता है। चार प्लांट द्वारा रोजाना 340 टन गोबर का प्रोसेसिंग हो रहा है, जबकि थराद और राधनपुर में नए प्लांट कार्यरत होने पर इस नेटवर्क की दैनिक क्षमता 515 मीट्रिक टन तक पहुंच जाएगी। गोबर से तैयार बायो सीएनजी सामान्य सीएनजी से सस्ती होती है, यहां तैयार स्वच्छ बायो-सीएनजी वाहन चालकों को 75 से 80 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर बेचा जाता है।
गुजरात में सामान्य सीएनजी का दर 92 - 94 रु प्रतिकिलो है। जिले में करीब 200 बायो सीएनजी प्लांट की योजना है जिससे वार्षिक 1,168 लाख किलो कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन होगा। इससे पशुपालकों को सालाना 875 करोड़ रु तक होगी। 'जापान-इंडिया को-ऑपरेटिव बायोगैस इनिशिएटिव' की मदद से देश में ऐसे एक हजार बायो सीएनजी प्लांट लगाने की योजना है।
चौधरी ने कहा कि बनास डेयरी दूध संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ हरित ऊर्जा को ग्रामीण आजीविका से जोड़कर पशुपालकों का भविष्य सुरक्षित करना है। इससे भारत के दूर-दराज के गांव देश को 'नेट जीरो' कार्बन उत्सर्जन की वैश्विक हरित क्रांति में अगुवा बनाने में भागीदार हो सकेंगे।
