'ऑपरेशन म्यूल हंट' से साइबर अपराधियों पर सर्जिकल स्ट्राइक
गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' चलाकर 2289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश किया।

गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट' चलाया

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जागरण ब्यूरो, गांधीनगर। साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए गुजरात पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया। करीब एक हजार म्यूल अकाउंट की जांच कर 2289 करोड़ रु के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश किया। पुलिस ने 565 प्राथमिकी दर्ज कर 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।]
गुजरात पुलिस ने गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 विशेष ऑपरेशन चलाया। संघवी इस अभियान की ऑनलाइन मोनिटरिंग भी करते रहे।

गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन म्यूल हंट'
गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने इस ऑपरेशन में म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई करके अलग-अलग मामलों में कुल 2289 करोड़ रु के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश कर 565 एफआईआर दर्ज कर 638 साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है।
म्यूल अकाउंट का उपयोग साइबर अपराधी धोखाधड़ी से पैसों को प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करते हैं। ऐसे खाते के मालिक को "मनी म्यूल" कहा जाता है।
अभियान के चलते चेक के जरिए निकासी में 75 प्रतिशत की गिरावट आई है वहीं मासिक चेक निकासी 126 करोड़ से घटकर 25 करोड़ हुई जो 80 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है।

कैसे कसा जाएगा शिकंजा?
अभियान को कारगर बनाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के तहत इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिए रिस्क स्कोरिंग प्रणाली लागू की जा रही है।
इस प्रणाली के तहत हर ट्रांजेक्शन को लो रिस्क, मीडियम रिस्क और हाई रिस्क के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा ताकि संदिग्ध अकाउंट की पहचान की जा सके। संदिग्ध अकाउंट की जानकारी अलग-अलग बैंकों के बीच शेयर करने के लिए http://mulehunter.ai नामक रजिस्ट्री भी बनाई गई है।
