गुजरात: 'कांग्रेस को सिस्टम की समझ नहीं, फ्री जैसा ही है टोकन...' नवरात्रि में एंट्री फीस पर संघवी का पलटवार
गुजरात सरकार ने नवरात्रि महोत्सव में प्रवेश के लिए 100 रुपये का ऑनलाइन टोकन सिस्टम शुरू किया है। कांग्रेस ने इसे धार्मिक उत्सव का व्यवसायीकरण बताया।

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी का कांग्रेस पर पलटवार (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात सरकार की ओर से आयोजित होने वाले नवरात्रि महोत्सव में सुरक्षा व व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आगामी 11 अक्टूबर से शुरु हो रहे महोत्सव में प्रवेश के लिए ऑनलाइन टोकन सिस्टम का एलान किया है।
कांग्रेस ने इसे धार्मिक उत्सव का व्यापारीकरण बताया तो उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बचाव करते हुए कहा कि यह महज टोकन है, पर्यटन विभाग ने एक अच्छा प्रयास किया है।
राज्य के पर्यटन विभाग ने गत दिनों एक परिपत्र जारी कर बताया कि 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे नवरात्रि महोत्सव में प्रवेश के लिए 100 रु का ऑनलाइन पास बुक कराना होगा।
दो दशक से भी अधिक समय से हो रहे इस महोत्सव में अब तक फ्री प्रवेश व्यवस्था थी लेकिन सरकार ने इस बार 100 रु का टोकन शुल्क रखा तो कांग्रेस ने धार्मिक उत्सव का व्यापारीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार लोगों की आस्था से जुड़े महोत्सव का भी व्यवसायीकरण कर रही है।
सरकार पर चौतरफा हमले के बाद उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी बचाव में उतरे और कहा है कि यह टिकट नहीं महज टोकन सिस्टम है। पर्यटन विभाग ने एक सराहनीय कार्य किया है, 100 रु में ऑनलाइन टोकन बुक कर कोई भी व्यक्ति नवरात्रि महोत्सव में प्रवेश पा सकता है।
सामान्य रूप से यह फ्री पास जैसा ही है, इसे खरीदने के लिए किसी काउंटर या सरकारी कार्यालय पर नहीं जाना है। सुरक्षा व व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग ने मामूली शुल्क लागू किया है। पर्यटन विभाग की यह सराहनीय पहल है।
संघवी ने कांग्रेस को आडे हाथ लेते हुए कहा कि आसपास के गांव के लोगों को पास वितरित किये जा रहे हैं, दिव्यांग बच्चों को निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई है। कांग्रेस को टोकन सिस्टम समझ में नहीं आया है उसे थोडी और जानकारी जुटानी चाहिए, इसके बावजूद सरकार इस मुद्दे पर चर्चा को तैयार है।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी का कहना है कि सरकार नवरात्रि महोत्सव जनता के पैसे से करती है, यह माताजी के श्रद्धा का पर्व है। सरकार पहले कोई आयोजन करती है और जब वह ब्रांड बन जाए तो जनता से मुनाफा वसूलने का प्रयास करती है।
सरकार को अधिकांश साधन, संसाधन व मैदान बिना खर्च मिल रहा है तो उस पर पैसा वसूल करना लोगों की भावना से खिलवाड़ है।
