गुजरात को परंपरागत खेती में मॉडल राज्य बनाने का अभियान, राज्यपाल ने नौ लाख किसानों को सिखाई प्राक्रतिक खेती
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों से यूरिया, डीएपी और कीटनाशकों का प्रयोग बंद कर प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राक्रतिक कृषि परिसंवाद को संबोधित किया। (फोटो साभार- सूचना विभाग गुजरात)
HighLights
राज्यपाल ने रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।
नौ लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया, 7500 मॉडल फार्म बने।
मां के दूध में भी यूरिया, कीटनाशक पाए जाने पर चिंता व्यक्त की।
शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राक्रतिक कृषि संवाद में किसानों से यूरिया, डीएपी, कीटनाशक का प्रयोग बंद कर जहर वाली खेती को छोडने का आह्वान किया। गुजरात के नौ लाख किसानों को प्राक्रतिक खेती से जोड़ने की यात्रा पर आयोजित एक परिसंवाद में राज्यपाल ने बताया कि 105 माताओं के दूध का परीक्षण किया गया तो उस दूध में भी यूरिया, कीटनाशक व डिटर्जेंट पाया गया।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने हिमाचल प्रदेश में राज्यपाल रहते प्राक्रतिक खेती के अभियान की शुरुआत की थी, करीब ढाई लाख किसानों को इससे जोड़ने के बाद उन्होंने गुजरात में इसकी शुरुआत की।
राज्यपाल के साथ परिसंवाद में कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी, सूचना एवं प्रसारण विभाग तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव डॉ. विक्रांत पांडे एवं कृषि विभाग के प्रधान सचिव आर सी मीणा भी मौजूद रहे।
राज्यपाल आचार्य द्रेवव्रत ने बताया कि वे चलें गांव की ओर अभियान के तहत हर सप्ताह एक तहसील के किसी गांव में जाकर रात्रि विश्राम वहां करते हैं और किसान, ग्रामीण, महिलाओं व बच्चों के साथ संवाद कर खेती, जीवनशैली, खान पान व उनके दैनिक जीवन के सुख दुख पर चर्चा करते हैं।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अपने गुरुकुल में 180 एकड़ में जमीन पर सफल प्राक्रतिक खेती के प्रयोग के बाद अब उनके इस अनुभव का लाभ हिमाचल व गुजरात राज्य के किसानों को मिल रहा है।

राज्यपाल ने हरित क्रांति की चर्चा करते हुए कहा कि जब वैज्ञानिक स्वामीनाथन ने इसकी शुरुआत की तब देश की मिट्टी में कार्बन की मात्रा 2 से ढाई फीसदी थी जो जंगल की जमीन के बराबर उपजाऊ थी। उस वक्त जमीन में प्रति एकड़ 13 किलो यूरिया डाला जाता था, लेकिन आज प्रति एकड़ यूरिया के 13 बैग डाल रहे हैं।
गुजरात के तीन कृषि विश्वविध्यालय की रिपोर्ट बताती हैं कि आज देश की कृषि भूमि की उर्वरता 0,2 से 0,3 तक पहुंच गई है जो बंजर भूमि के बराबर है। उन्होंने 105 माताओं के दूध के परीक्षण का उदाहरण देकर बताया कि इस जहर से अब मां का दूध भी अछूता नहीं रहा।
रासायनिक खाद व कीटनाशक जमीन की उर्वरता को खत्म कर मिट्टी के नीचे एक सख्त सीमेंट जैसी परत बना रहे हैं जिससे बैक्टीरिया, केंचूआ व धरती को उपजाऊ बनाने वाले जीव व कीट नष्ट हो रहे हैं।
आचार्य देवव्रत बताते हैं कि जैविक खेती केनाम पर वर्मी कंपोस्ट व गोबर की खाद डाली जा रही है लेकिन यह कारगर व उपयुक्त् नहीं है।
जीवाम्रत व घनजीवाम्रत बनाने का तरीका
राज्यपाल ने बताया कि देशी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं, गाय का गोबर, गौमूत्र, गुड, किसी भी दाल का आटा या बेसन व मिट्टी को मिलाकर यह तरल जीवाम्रत तैयार किया जाता है जो मिट्टीको पुर्नजीर्वित कर देता है। इसके डालने के बाद धरती में केंचूआ पैदा होते हैं और करोड़ों बैक्टीरिया पौधे को खुराक व नाइट्रोजन बनाकर देने लगते हैं।
गुजरात के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने बताया कि मुख्यमंत्री रहते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के किसानों के विकास के लिए कई योजनाएं प्रारंभ की इनमें से एक प्राक्रतिक खेती अभियान है जो अब सफलता की ओर बढ रहा है। इस खेती से जुड़े किसानों को सरकार देशी गाय के पालन के लिए 12 हजार रुपये सालाना उपलब्ध कराती है साथ ही परंपरागत बीज के संरक्षण व उनके उत्पादन का पर्याप्त मुनाफा प्राप्त हो सके ऐसी भी व्यवस्था की जा रही है।
गुजरात कृषि विभाग के प्रधान सचिव आर सी मीणा ने बताया कि राज्यपाल ने अपने इस अभियान में अब तक करीब नौ लाख किसानों को प्राक्रतिक खेती से जोड़ा है इसके लिए 48,900 क्लस्टर बनाए 7,500 मॉडल फॉर्म बनाकर किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। पर्यावरण सुरक्षा के साथ अभियान से म्रदा स्वस्थ्य हुई और किसान भी सम्रद्ध हुए हैं।
सूचना एवं प्रसाण विभाग तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव डॉ. विक्रांत पांडे ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्राक्रतिक खेती से तैयार उत्पाद व अनाज की बिक्री के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये जिसके बाद राज्य में इन किसानों के लिए 300 बिक्री केंद्र खोले गये।
