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गुजरात में गोहत्या पर ऐतिहासिक फैसला: तीन दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट में मनुस्मृति का जिक्र

Published: Thu, 29 Oct 2026 11:11 PM (IST)

गांधीनगर की एक अदालत ने तीन गोहत्यारों को आजीवन कारावास और तीन लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ...और पढ़ें

गांधीनगर अदालत ने तीन गोहत्यारों को आजीवन कारावास दिया

गांधीनगर अदालत ने तीन गोहत्यारों को आजीवन कारावास दिया

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डिजिटल डेस्क, गांधीनगर। गुजरात में गांधीनगर जिले की एक अदालत ने तीन गोहत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों- वसीम कुरैशी, मोहम्मद रफीक कुरैशी और अशफाक बहेलिम पर तीन लाख रुपये जुर्माना भी लगाया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बीआर राजपूत ने अपने फैसले में प्राचीन हिंदू ग्रंथ मनुस्मृति, वेदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए गाय की महिमा भी बताई।

गांधीनगर अदालत ने तीन गोहत्यारों को आजीवन कारावास दिया

सोमवार को सुनाए फैसले में मनुस्मृति का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि गाय केवल पशु नहीं है, बल्कि उसे भौतिक समृद्धि और ‘धर्म’ (सदाचार) का आधार माना गया है।

अदालत ने कहा कि जब अमृत की बूंदें धरती पर गिरीं, तब कामधेनु प्रकट हुईं। उन्हें धरती पर गोवंश की सभी प्रजातियों की जननी माना जाने लगा। गाय को विश्व की माता माना गया है।

उसके शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। गाय के चार पैरों को चार वेदों का प्रतीक भी बताया गया। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला स्पष्ट संदेश है कि राज्य में गोहत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा।

अदालत ने फैसले में मनुस्मृति और वेदों का उल्लेख किया

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 अगस्त 2024 को गांधीनगर जिले के जमला गांव में घर पर छापेमारी के दौरान छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। मौके से 277 किलो गोमांस, पशुओं के वध में इस्तेमाल होने वाले हथियार और एक वाहन बरामद किया गया था।अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि पिता-पुत्र कमजोर या दूध नहीं देने वाली गायों और भैंसों को खरीदते थे।

इसके बाद अहमदाबाद से चार अन्य लोगों को बुलाया जाता था और पशुओं की हत्या कर मांस तैयार किया जाता था। यह काम आर्थिक लाभ कमाने के लिए किया जा रहा था। सुनवाई के बाद अदालत ने छह में से तीन लोगों को दोषी पाया।

गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने 1954 के गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम में 2017 में संशोधन कर गोहत्या के दोषियों की सजा बढ़ाकर आजीवन कारावास कर दी थी। इस कदम के साथ गुजरात गोहत्या के लिए आजीवन कारावास का प्रविधान करने वाला देश का पहला राज्य बना था।