गांधीनगर, जेएनएन। गुजरात के मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि मंदी जैसा कुछ नहीं है, यह केवल एक हवा है। गुजरात में अभी तक एक भी मामला ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया। रूपाणी ने सूक्ष्‍म व मध्‍यम व्‍यापारियों को किसी भी क्षमता के सोलर पैनल लगाने की छूट दी है।

गांधीनगर में ऊर्जा विभाग की पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्‍यमंत्री विजय रुपाणी ने यह एलान किया की स्‍मॉल एंड मीडियम स्‍केल इंडस्‍ट्री अगर सोलर पैनल लगाना चाहे तो लगा सकती है, उसे प्रति यूनिट दो रुपये 75 पैसा से तीन रुपये 80 पैसा तक का लाभ होगा। पहले इन उद्यमों में सोलर पैनल लगाने के लिए एक क्षमता तय थी, लेकिन अब उद्यमी अपने कार्यस्‍थल या अन्‍य किसी खाली जगह पर सोलर पैनल लगा सकेंगे।

ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल ने बताया कि राज्‍य में 33 लाख एमएसएमई हैं, जिन्‍हें इस योजना से अधिकतम लाभ होगा। गुजरात क्‍लीन व ग्रीन एनर्जी की ओर अग्रसर है, इसी नीति को आगे बढातेहुए सरकार ने एमएसएमई को यह छूट दी है। वर्ष 2022 तक सरकार राज्‍य के आठ लाख घरों को सोलर रूफ टॉप योजना से जोड़ना चाहती है।

मंदी से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए मुख्‍यमंत्री रूपाणी ने कहा कि मंदी एक हवा है। गुजरात में अभी तक ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया है, जिसे मंदी के चलते अपना उद्योग बंद करना पड़ा हो। व्‍यापार निजी लोग करते हैं, सरकार नीतियां बनाने का काम करती है। उद्रयोगों को महंगी बिजली मिलती है, इसलिए सरकार उन्‍हें राहत देने के लिए यह योजना लाई है। सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत सोलर प्‍लांट लगाने वाले उद्यमियों से इलेक्‍ट्रीसिटी ड्यूटी व व्‍हीलिंग चार्ज तो वसूल किए जाएंगे। लेकिन उपभोग से अधिक उत्पा‍दित बिजली सरकार खरीदेगी, जिससे व्‍यापारी को प्रति यूनिट पौने दो से पौने चार रुपये तक का लाभ होगा।

गौरतलब है कि मंदी को लेकर वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण से लेकर भाजपा के कई नेताओं के बयानों को लेकर उद्योग जगत, मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में तरह तरह की चचाएं है। एक ओर सरकार मंदी से निपटने की जोर शोर से तैयारी कर रही है, दूसरी ओर भाजपा व सरकार मंदी होने की बात से ही किनारा कर रही है।

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