चंदे के नाम पर 'कैशबैक', गुजरात में 1,100 रुपये करोड़ के टैक्स चोरी सिंडिकेट का भंडाफोड़; BNJD नेताओं पर केस दर्ज
गुजरात के गांधीनगर में राजनीतिक चंदे की आड़ में 1,143 करोड़ रुपये से अधिक के टैक्स चोरी घोटाले का खुलासा हुआ है।

राजनीतिक चंदे की आड़ में 1143 करोड़ रुपये का टैक्स चोरी घोटाला (सांकेतिक तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात के गांधीनगर में कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने राजनीतिक चंदे की आड़ में चलाए जा रहे एक घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में सेक्टर-11 स्थित रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल भारतीय नेशनल जनता दल और उसके शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी का आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई आयकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर (यूनिट 2-1, अहमदाबाद) डॉ. राजेंद्र राज की आधिकारिक शिकायत के बाद शुरू की गई है।
1,143 करोड़ का संदिग्ध ट्रांजैक्शन
आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 के दौरान भारतीय नेशनल जनता दल ने 56 हजार से ज्यादा करदाताओं से 1,143 करोड़ रुपये से ज्यादा का फर्जी राजनीतिक चंदा हासिल किया। करदाताओं का RTGS जैसे बैंकिंग चैनलों के जरिए पार्टी खातों में पैसा भेजने के लिए जोड़ा जाता था।
इसके बदले पार्टी फर्जी चंदा रसीदें जारी करती थी, जिनके सहारे दानदाता आयकर अधिनियम के तहत 100 प्रतिशत टैक्स में छूट का दावा करते थे। चुनाव आयोग को फॉर्म 24A में फर्जी योगदान रिपोर्ट सौंपकर और गलत अकाउंटिंग रिकॉर्ड दाखिल कर सरकारी खजाने को लगभग 343 करोड़ रुपये के आयकर का सीधा नुकसान पहुंचाया गया।
शेल कंपनियों, अंगड़िया और हवाला नेटवर्क
जांच में सामने आया कि पार्टी के बैंक खातों में आई रकम को J ट्रेडिंग, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी डमी व फ्रंट कंपनियों में ट्रांसफर किया जाता था। इस फंड ट्रांसफर को सही ठहराने के लिए अनाज, दालों और अन्य सामानों की फर्जी खरीदारी के इनवॉइस तैयार किए जाते थे।
फ्रंट कंपनियों के खातों में पैसा पहुंचते ही पूरा कैश निकाल लिया जाता था। आरोपी इसमें से 2 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक का तय कमीशन काटते थे और बाकी की बड़ी रकम अंगड़िया नेटवर्क तथा हवाला चैनलों के जरिए मूल दानदाताओं को नकद वापस लौटा दी जाती थी।
मास्टरमाइंड और सहयोगियों की भूमिका
शिकायत में पार्टी अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार विट्ठलभाई गजेरा को इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य मास्टरमाइंड बताया गया है, जो कमीशन की दरें तय करने से लेकर डमी फर्मों का संचालन संभालता था। महासचिव विपुल सोलंकी पर दानदाताओं का विवरण मिलाने और फर्जी रसीदें जारी करने का आरोप है।
शुरुआती पूछताछ से खुलासा हुआ कि पार्टी की कोई वास्तविक राजनीतिक गतिविधि नहीं थी, बल्कि सिर्फ दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर सीमित मौजूदगी रखी गई थी।
इसके अलावा, पार्टी कोषाध्यक्ष रोनकसिंह चावड़ा के घर पर हुई छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने ट्रांजैक्शन रसीदें और डिजिटल संचार लॉग जब्त किए, जिनसे अंगड़िया के जरिए रकम भेजने की पुष्टि हुई। मामले में चार्टर्ड अकाउंट और ऑडिटर आदिल सैयद का नाम सामने आया है, जिस पर बिना वास्तविक जांच या कार्यालय दौरा किए, आर्थिक लाभ के लिए फर्जी ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर डिजिटल हस्ताक्षर करने का आरोप है।
एजेंसियों ने नामजद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है।
