अहमदाबाद, जेएनएन। देश के अन्य राज्यों की तरह ही गुजरात के किसानों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। यहांं के किसान भी कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर रहे हैं। इस बीच राज्य के किसानों ने कर्ज माफी के लिए मांग तेज कर दी है। किसानों ने उत्तर गुजरात के अरवल्ली जिले के सतारडा गांव में कर्ज माफी के साथ आंदोलन शुरू किया हैं।

राज्य के 43 प्रतिशत किसान कर्जदार हैं। इन पर औसतन 38 हजार रुपये कर्ज है। गुजरात में किसानों का संगठन चलानेवाली भाजपा समर्थित किसानों का संगठन किसान संघ किसानों की कर्ज की समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं।

गुजरात के किसान बेमौसम बरसात के कारण आर्थिक तौर पर भारी नुकसान उठा रहे हैं। राज्य सरकार ने सहायता पैकेज की घोषणा की है किन्तु अभी तक 30 लाख से भी अधिक किसानों ने सहायता का फार्म ही नहीं भरा है। किसान फसल बीमा का इंतजार भी कर रहे हैं। सरकारी आदेश के बाद भी निजी फसल बीमा कम्पनियां इसमें विलंब कर रही हैं। ऐसे हालात में गुजरात के किसान कर्ज माफी की मांग करने लगे हैं।

गुजरात राज्य के अरवल्ली जिले में तो किसानों ने कर्ज माफी की मांग के साथ आंदोलन भी शुरू कर दिया है। मालपुर तहसील के सतारडा गांव के किसानों ने कर्ज की माफी के लिए आंदोलन शुरू किया है। वहीं पाटण के विधायक किरीट पटेल ने किसानों की कर्ज माफी की मांग करते हुए कहा है कि भगवान भाजपा सरकार को कर्ज माफी के लिए सद्बुद्धि दें।

उन्होंने कहा कि गत वर्ष कम बरसात के कारण किसानों को नुकसान हुआ तो इस वर्ष बेमौसम बरसात के कारण नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार से मांग की गयी है कि वह ऐसे विपरीत हालात में किसानों का कर्ज माफ करे। हांलाकि किसानों के साथ हमदर्दी का दावा करनेवाली सरकार किसानों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।

गुजरात के 43 प्रतिशत किसान कर्ज में डूबे हुए हैं। कृषि स्टेटेस्टक्स के अनुसार गुजरात के 58.72 लाख किसान अर्थात 66.9 प्रतिशत लोग कृषि से सम्बद्ध है। इनमें से 39.31 लाख किसानों पर कर्ज हैं। कुल 34 लाख किसानों ने 54,237 करोड़ रुपये टर्म लोन लिए हैं। इनमें ट्रैक्टर की खरीदी के लिए 204 करोड़ रुपये कर्ज लिए हैं। प्रत्येक किसान पर औसतन 38100 रुपये कर्ज हैं। महाराष्ट्र में सरकार ने किसानों का दो लाख रुपये कर्ज माफ किया है। अब गुजरात के किसान भी महाराष्ट्र की तरह ही कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं। इसके लिए आंदोलन की शुरूआत भी हो चुकी हैं।  

Posted By: Preeti jha

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