अहमदाबाद, एएनआइ। गुजरात के द्वारका से 223 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में वीरवार अपराह्न सवा तीन बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि भूकंप से अभी तक कहीं जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बात की और द्वारका के पास भूकंप से उत्पन्न स्थिति के बारे में जानकारी ली। इधर, नेशनल सेंटर फार सीस्मोलाजी के मुताबिक,  रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई है। गुजरात में भूकंप के झटके महसूस होते ही चारों ओर अफरातफरी मच गई। लोगों ने अपने सगे-संबंधियों और रिश्तेदारों को भूकंप की जानकारी दी और उनका कुशलक्षेम पूछा।

इससे पहले भी देश और विदेश में कई जगह भूकंप के झटके महसूस हो चुके हैं। अभी हाल में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में रविवार शाम 6:48 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। नेशनल सेंटर फार सीस्मोलाजी के मुताबिक, यहां भूकंप की तीव्रता 4.3 मापी गई थी। गौरतलब है कि दुनिया भर में हर साल भूकंप के हजारों छोटे-बड़े झटके महसूस किए जाते हैं। कई देशों में बड़े भूकंप के कारण हजारों लोगों की जानें भी जा चुकी है। दुनियाभर के कई इलाकों में जब तेज भूकंप आता है तो बड़े पैमाने पर नुकसान भी होता है।

जानें, क्यों आता है भूकंप

पृथ्वी की बाह्य परत में अचानक हलचल से उत्पन्न ऊर्जा के कारण भूकंप आता है। यह ऊर्जा पृथ्वी की सतह पर, भूकंपी तरंगें उत्पन्न करती है, जो भूमि को हिलाकर या विस्थापित कर के प्रकट होती है। भूकंप प्राकृतिक घटना या मानवजनित कारणों से हो सकता है। अक्सर भूकंप भूगर्भीय दोषों के कारण आते हैं। भूकंप का क्षण परिमाण पारंपरिक रूप से मापा जाता है या संबंधित व अप्रचलित रिक्टर परिमाण लिया जाता है। तीन या कम परिमाण की रिक्टर तीव्रता का भूकंप अक्सर इंपरसेप्टीबल होता है और सात रिक्टर की तीव्रता का भूकंप बड़े क्षेत्रों में गंभीर क्षति का कारण होता है। झटकों की तीव्रता का मापन विकसित मरकैली पैमाने पर किया जाता है। भूकंप से जान, माल की हानि, मूलभूत आवश्यकताओं की कमी, रोग आदि होता है। इमारतों व बांध, पुल, नाभिकीय ऊर्जा केंद्र को नुकसान पहुंचता है। भूकंप से क्षतिग्रस्त बांध के कारण बाढ़ आ सकती है।

इस तरह करें भूकंप से बचाव

-सुरक्षित स्थान पर भूकंपरोधी भवन का निर्माण कराएं।

-समय-समय पर आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण लें व पूर्वाभ्यास करें।

-आपदा की किट बनाएं, जिसमें रेडियो, जरूरी कागज, मोबाइल, टार्च, माचिस, मोमबत्ती, चप्पल, कुछ रुपये व जरूरी दवाएं रखें।

-भूकंप आने पर परिवार के लोगों को बिजली व गैस बंद करने को कहें।

-भूकंप के दौरान टेबल, पलंग या मजबूत फर्नीचर के नीचे शरण लें।

-संतुलन बनाए रखने के लिए फर्नीचर को कस पकड़ लें।

-लिफ्ट का प्रयोग कतई न करें।

-खुले स्थान पर पेड़ व बिजली की लाइनों से दूर रहें।

-मकान ध्वस्त हो जाने के बाद उसमें न जाएं।

-कार के भीतर हैं तो उसी में रहें, बाहर न निकलें।

Edited By: Sachin Kumar Mishra