गुजरात: चैतर वसावा की गिरफ्तारी को भुना रही है 'आप', अंबाजी से उमरगाम तक निकाली जा रही है आदिवासी न्याय यात्रा
आम आदमी पार्टी गुजरात में अपने विधायक चैतर वसावा की गिरफ्तारी को भुना रही है, जिसके लिए अंबाजी से उमरगाम तक 'आदिवासी न्याय यात्रा' निकाली जा रही है।

गुजरात में आप भुना रही चैतर वसावा की गिरफ्तारी

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शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। सरकारी कर्मचारियों से मारपीट, फायरिंग व पिफरौती के मामले में जेल में बंद गुजरात आप विधायक चैतर वसावा के जेलवास को आम आदमी पार्टी भुनाने के प्रयास में है। अंबाजी से उमरगाम के आदिवासी पट्टे में आदिवासी न्याय यात्रा निकालकर आप, कांग्रेस व भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की जुगत में है। चैतर वसावा की दोनों पत्नी शकुंतला एवं वर्षा भी इस न्याय यात्रा में शामिल हैं।
गुजरात में अगले वर्ष के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी भाजपा व कांग्रेस के आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर रही है। आपराधिक केस के चलते जेल में बंद आदिवासी नेता एवं विधायक चैतर वसावा के जेलवास को आप भुनाने के प्रयास में है।
अंबाजी से उमरगाम तक आदिवासी न्याय यात्रा निकालकर आप नेता राज्य सरकार को आदिवासी विरोधी बताने का प्रयास कर रहे हैं। न्याय यात्रा में विधायक चैतर वसावा की दोनों पत्नी शकुंतला एवं वर्षा भी आप के साथ शामिल हैं।
गुजरात के आप संयोजक इसूदान गढवी ने आप की जनसभा में कहा है कि अंबाजी से उमरगाम तक का आदिवासी समाज एकजुट होकर भाजपा को वोट न देने की शपथ ले। आदिवासी हक और अधिकारों के लिए लड़ने वाले चैतर वसावा को भाजपा ने झूठी साजिश में फंसाया है। गढवी ने कहा कि भाई चैतर की दोनों पत्नियां वर्षाबेन और शकुंतलाबेन झांसी की रानी की तरह लड़ रही हैं।
आदिवासियों के लिए बनी वनबंधु योजना के 1 लाख करोड़ रु जहां आदिवासियों तक पहुंचने के बजाय भाजपा नेताओं की जेब में चले गए वहीं चैतर वसावा ने भाजपा के सभी लालच और प्रस्तावों को ठुकराकर समाज का साथ चुना।
आप विधायक एवं पाटीदार नेता गोपाल इटालिया ने कहा कि भाजपा का खेस पहने रहने वाले अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और समाज के लिए लड़ने वाले जेल में हैं। चैतर भाई का एक ही अपराध है कि वे आदिवासी समाज के हक और अधिकारों के लिए लड़ते हैं। उनको जेल में डालकर भाजपा ने पूरे आदिवासी समाज का अपमान किया है।
आम आदमी पार्टी चैतर वसावा और आदिवासी समाज के लिए कभी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने आदिवासी युवाओं से राजनीति विरोध भुलकर यात्रा में शामिल होने की अपील की। विधायक चैतर वसावा की पत्नी शकुंतला वसावा यह यात्रा केवल चैतर वसावा की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई है।
आदिवासियों की शिक्षा और नकली प्रमाणपत्रों के मुद्दे पर आवाज उठाने के कारण सरकार ने चैतर को जेल में डाल दिया। चैतर वसावा की दूसरी पत्नी वर्षाबेन वसावा ने कहा है कि चैतर को जेल में डालने का बदला जनता को राज्य सरकार से लेना है। जब घर का मुख्य सदस्य घर में नहीं होता, तब कितनी मुश्किलें आती हैं, यह हम जानते हैं।
