अहमदाबाद। इस समय सुभाषचंद्र बोस और अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न की चर्चाओं पर हंगामा मचा हुआ है। नेताजी के परिजन का कहना है कि सरकार जब नेताजी की मौत को स्वीकार ही नहीं कर रही है तो फिर उन्हें मरणोपरांत सम्मान क्यों दे रही है? नेताजी का पड़पोते सुगाता बोस ने कहा है कि 'राजीव गांधी समेत 43 लोगों को भारत रत्‍‌न दिया जा चुका है। उनके बाद उन्हें यह सम्मान कैसे दिया जा सकता है, नेताजी का कद भारत रत्‍‌न से काफी ऊंचा है।'

वहीं, यह बात शायद बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि नेताजी की अस्थियां जापान के एनकोजी मंदिर में 68 साल से संभाल कर रखी गई हैं। यह दावा जापान में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिक बीएस देशमुख ने हाल ही में अहमदाबाद की यात्रा के दौरान किया था।

वे अपने संगठन 'नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेमोरियल इंडो-जापान फाउन्डेशन' के बैनर तले देशमुख चार साल से नेताजी की अस्थियां स्वदेश लाने के लिए प्रयासरत हैं। अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देशमुख ने कहा था कि 'नेताजी की मृत्यु के बारे में भारत में अफवाएं फैलाई गई हैं। हकीकत में 1945 में ताईवान के हवाई हादसे में नेताजी का निधन हो गया था। उनकी अस्थियां जापान के एनकोजी मंदिर में 68 साल से संभाल कर रखी गई हैं।'

उन्होंने यह भी कहा था कि नेहरू एवं इंदिरा जब जापान गए थे, तब भी उनके समक्ष नेताजी की अस्थियां भारत ले जाने का मुद्दा उठाया गया था। इसके अलावा भारत केंद्रीय मंत्री जब भी जापान दौरे पर आए। उनके सामने भी मामला उठाया गया था। बावजूद कोई प्रयास भारत सरकार ने नहीं किया।'

देशमुख के अनुसार, इस मामले में वे अब तक भारत के राष्ट्रपति, केंद्र सरकार, ममता बेनर्जी, नरेंद्र मोदी सहित अनेक लोगों को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन इसका जवाब सिर्फ नरेंद्र मोदी, आरएएस के सरसंघचालक मोहन भागवत और उद्योगपति रतन टाटा ने ही दिया है। मोदी ने पत्र लिखकर यह विश्वास भी दिलाया था कि वे नेताजी की अस्थियां भारत लाने के प्रयास करेंगे।