राउल गोंजालेज

जिस आयोजन का हम सब को इंतजार है, वह अब बस कुछ ही दिन दूर है। मैं यह स्वीकार करना चाहूंगा कि विश्व कप के बारे में सोचकर मैं थोड़ा उदास हो जाता हूं। 2008 से 2012 तक सब कुछ जीतने वाली स्पेनिश टीम का मैं हिस्सा नहीं था। मुझे हमेशा ही एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी के बिना ही जीना होगा।

ऐसा नहीं है कि मेरे करियर में खुशियों के पल नहीं आए। स्पेन की कप्तानी करना बहुत बड़ा सम्मान था, रीयल मैड्रिड का हिस्सा होना और क्लब के लिए सभी ट्रॉफी जीतना खास था। मुझे कोई शिकायत नहीं है, लेकिन बस थोड़ा सा खालीपन है। 2006 में प्री क्वार्टर फाइनल में जिनेदिन जिदान के शानदार प्रदर्शन से हारने से पहले हमने ग्र्रुप में सभी मैच जीते थे। इसके बाद जो हुआ, उससे दर्द कम होता चला गया क्योंकि स्पेन ने शानदार फुटबॉल का प्रदर्शन किया और गेंद को कब्जे में रखने और पास देने की खास रणनीति को लोकप्रिय किया। दुनिया ने भी इसका लुत्फ उठाया। 2014-16 के खराब समय और कुछ बदलावों के बाद टीम को फिर से बुलंदियां छूने को तैयार होते देख अच्छा लग रहा है। जुलेन लोपेतेगुई के नेतृत्व में हमने एक भी मैच नहीं गंवाया है और 18 में से 13 मैच जीते हैं। 59 गोल करने और 47 गोल का अंतर टीम की ताकत को बताता है। इस टीम में युवाओं और अनुभवी खिलाडिय़ों का अच्छा मिश्रण है और यह टीम आगे तक जा सकती है।

यह एक रोचक तथ्य है कि पिछले तीन विश्व कप विजेता इटली, स्पेन और जर्मनी यूरोप से हैं। इस बार आयोजन रूस में है और दक्षिण अमेरिकी टीमों के लिए खिताब जीतना इसबार मुश्किल होगा। बड़ी संख्या में यूरोपीय प्रशंसकों की मौजूदगी भी बड़ा अंतर पैदा करेगी। 2014 की निराशा के बाद ब्राजील फिर से एक अच्छी टीम के रूप में दिख रही है। इस युवा टीम में बहुत सारे आक्रमक खिलाड़ी हैं, लेकिन यह देखना होगा कि उनका डिफेंस कैसा रहता है। हालांकि संभवत: अपने आखिरी विश्व कप में मेसी अपना जादू बिखेरने को बेताब होंगे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि अर्जेंटीना इस बार पहले जैसी मजबूत और संंयोजित टीम है।

इस बार जर्मनी जरूर इटली (1934, 1938) और ब्राजील (1958, 1962) की तरह लगातार दो विश्व कप जीतने का दम रखती है। 2014 के बाद लेहम  क्लोस और श्वेजनाइगर संन्यास ले चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वह एक मजबूत टीम है। वह लंबे समय से एक ऐसे कोच के नेतृत्व में खेल रहे हैं, जिन्हें इस स्तर की जरूरतों के बारे में अच्छे से पता है। पिछले साल दूसरी दर्जे की टीम के साथ कन्फेडेरेशन कप जीतने से उनकी टीम की गहराई का पता चलता है, खासतौर से मिडफील्ड में। पुर्तगाल, फ्रांस और बेल्जियम भी मजबूत टीमें हैं।

क्रिस्टियानो रोनाल्डो के अपनी जिंदगी की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में होने से उनकी टीम के खिलाफ सतर्कता बरतनी होगी। हमें पुर्तगाल के डिफेंस को भी नहीं भूलना चाहिए, जो यूरो 2016 में उनकी सफलता का प्रमुख कारण था। जिस टीम ने बिना रोनाल्डो के उच्च दबाव वाले मैच में फ्रांस को हरा दिया, उसे गंभीरता से लेना ही चाहिए।   

यह रोचक है कि स्पेन का पहला मुकाबला पुर्तगाल से है। रोनाल्डो बनाम सर्जियो रामोस, रियल मैड्रिड के दो दिग्गजों के बीच मुकाबले का सभी को इंतजार है। जो भी जीतेगा, उसे ग्र्रुप में शीर्ष पर रहना चाहिए क्योंकि ईरान और मोरक्को में से किसी को च्यादा परेशानी होती नहीं दिख रही है। ये दोनों अच्छी टीमें हैं, लेकिन यूरोपीय दिग्गजों के सामने इनका टिकना मुश्किल है। स्पेन का असली सफर पहले दौर के बाद शुरू होगा और उम्मीद है कि महान संस्कृति वाले देश में आंद्रे इनेस्ता को शानदार विदाई मिलेगी।

(लेखक स्पेन के स्ट्राइकर रहे हैं।)

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By Sanjay Savern