डिएगो माराडोना

विश्व कप को सोचकर मुझे खुशी भी होती है और दुख भी। 1986 में विश्व कप जीत के साथ वह मेरा सुनहरा समय था। चार साल पहले की निराशा के बाद हमें खुद को साबित करना था। 1990 में, हम एक और फाइनल जीत से चूक गए। मैं अभी भी यहीं महसूस करता हूं कि जैसे फीफा द्वारा हमें लूटा गया हो। सभी फैसले हमारे खिलाफ गए। 

मौजूदा विश्व कप की बात करते हैं, तो अर्जेंटीना सबसे मुश्किल ग्रुप में है। हम जानते हैं कि लियोनेल मेसी क्या कर सकते हैं और वह प्रतिबद्ध भी हैं, लेकिन यहां चिंता के कई क्षेत्र हैं। खासकर डिफेंस में और अटैक में भी, टीम के स्टार खिलाड़ी को समर्थन नहीं मिल पा रहा है। रूस में चुनौती दक्षिण अमेरिकी क्वालीफायर्स से बिल्कुल अलग होगी। यूरोपीय देश अन्य महाद्वीपों की टीमों की तुलना में ज्यादा मजबूत हैं। इस स्तर पर तकनीक और कौशल में तो टीमों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता है, लेकिन अनुशासन उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। क्रोएशिया और आइसलैंड को हराना बहुत ही मुश्किल होगा। नाइजीरिया किसी के लिए भी मुसीबत बन सकता है। इससे यह मौत का ग्रुप बन गया है। 

क्वालीफाइंग अभियान में जॉर्ज साम्पोली के रक्षात्मक खेल से खुश नहीं था। हालांकि उस समय मैनेजर ने कमान संभाली ही थी और चीजों को नए सिरे से करने के लिए समय भी था। क्रोएशिया यूरोप की बेहतरीन टीमों में से एक है क्योंकि उनके खिलाड़ी कई शीर्ष लीग में खेल रहे हैं। मिडफील्डर मॉडरिक-रकीटिक और कोवासिक से किसी भी विपक्षी टीम को जलन हो सकती है। स्ट्राइकर मारियो मानजुकिच 32 साल के हैं, लेकिन बॉक्स के भीतर हर चीज के लिए संघर्ष करते दिखते हैं। आइसलैंड को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि जो टीम यूरो कप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची हो, वह निश्चित तौर पर मजबूत होगी और उसके खिलाफ गोल करना आसान नहीं होगा। 

इसके बाद नाइजीरिया की बात करते हैं। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि अफ्रीकी देश अपना सर्वश्रेष्ठ खेल बड़ी टीमों के लिए बचाकर रखते हैं। 2014 में इस टीम के खिलाफ हमारा मुकाबला काफी करीबी रहा था। मेसी के दो गोल की बदौलत हमने वह मुकाबला 3-2 से जीता था। नाइजीरिया पहले दौर में ही अर्जेंटीना के लिए खतरनाक साबित हो सकती है, इसलिए हमें पहले दिन से ही सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना होगा।

साम्पोली को गोलकीपर सर्गियो रमेरो की कमी खलेगी। अच्छा गोलकीपर होने के साथ-साथ वह बॉक्स के भीतर चीजों को नियंत्रित करने के लिए अहम थे। उनके विकल्प के पास बहुत ही कम अंतरराष्ट्रीय अनुभव है, इससे मुझे सर्गियो गोयोचेहा की याद आ जाती है। 1990 में नेरी पंपिडो की टांग टूटने के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया था। टाई ब्रेकर में उन्होंने असाधारण प्रदर्शन किया था। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था और वह अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब रहे।

अर्जेंटीना को मैनचेस्टर सिटी के विली काबालेरो से ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद होगी। इसमें कोई शक नहीं है कि मेसी सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं। अगर वह विश्व कप नहीं भी जीतते हैं, तो भी यही सच रहेगा। यह दुर्भाग्यपूर्ण था कि ब्राजील में वह अर्जेंटीना को फाइनल तक ले गए, लेकिन दो कोपा अमेरिका फाइनल्स की तरह यहां भी अपने काम को अंजाम तक नहीं पहुंचा सके। सीनियर स्तर पर कोई बड़ा खिताब जीते हमें करीब 25 साल बीत चुके हैं। इस सिलसिले को खत्म करने के लिए लियो सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हो सकते हैं। वह जो भी करते हैं, वह विशुद्ध जादू है। क्या वह बढ़त को सफलतापूर्वक बचा पाएंगे? मैं कहना चाहूंगा कि साम्पोली ने ऐसा सुनिश्चित करने के लिए काफी मेहनत की है।

अन्य टीमों की बात करें तो जर्मनी और स्पेन मजबूत दिख रही हैं। स्पेन ने मैत्री मैच में हमें 6-1 से हराया, लियो इस मैच में नहीं खेले थे। मगर इस अंतर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पुर्तगाल, फ्रांस और बेल्जियम भी अच्छी टीमें हैं। हालांकि मुझे यह कहना पसंद नहीं है, लेकिन ब्राजील ने 2014 की शर्मनाक हार को पीछे छोड़ दिया है। अब समय आ गया है जब हमें खुद को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए तैयार हो जाना चाहिए।

(लेखक अर्जेंटीना के मिडफील्डर रहे हैं)

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Posted By: Sanjay Savern