(ओलिवर कान)

ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है जब चार साल में एक बार होने वाले टूर्नामेंट में जीत दर्ज करने के बाद अगले संस्करण में जर्मनी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया हो। 1978 में हमने छह मैचों में से सिर्फ एक जीत के बाद दूसरे दौर में बाहर हो गए। 1994 में हमें क्वार्टर फाइनल में हार झेलनी पड़ी। 1998 इस मायने में अपवाद रहा। इससे पहले खिताब नहीं जीतने के बावजूद हम यहां विफल रहे। मैं यह बातें इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि विश्व कप जीतने के बाद अगले संस्करण में अच्छा नहीं करने का रिकॉर्ड रूस में टूटने वाला है। हम फीफा रैंकिंग में नंबर एक हैं और खिताब के प्रबल दावेदार हैं। क्वालीफाइंग ग्रुप में सभी 10 मैचों में जीत कोच जोकिम लो की टीम की मजूबती को बयां करती है।

आखिर क्या चीज है, जो जर्मनी को इतना मजबूत बनाती है? मैं तो यही कहूंगा कि उनकी सप्लाई लाइन, जो लगातार विश्व स्तरीय खिलाड़ी पैदा करती रहती है और अनुभवी नेतृत्व की मौजूदगी। चैंपियन खिलाडिय़ों के साथ युवा खिलाड़ी अच्छे से घुलमिल गए हैं। टीम में हर पोजीशन के लिए प्रतिस्पर्धा है। इसका एक उदाहरण है कि पिछले साल जर्मनी ने अपनी बी टीम के साथ ही कन्फेडेरेशन कप जीत लिया। पिछले कुछ साल में टीम की तरक्की और फॉर्म ने मुझे आशावादी बना दिया है। हालांकि फिलिप लाम की जगह लेना असंभव है, लेकिन जोशुआ किमिच एक अच्छे खिलाड़ी हैं। सिर्फ 23 साल की उम्र के इस खिलाड़ी में चमक है। हालांकि ब्रायन म्यूनिख चैंपियंस लीग के सेमीफाइनल के दोनों चरणों में उनके द्वारा किए गए गोल का फायदा उठाने में विफल रहा। इके गुंडोगन ओर लेरॉय सेन ने मैनचेस्टर यूनाइटेड के सफल प्रीमियर लीग अभियान में प्रभावित किया। कन्फेडेरेशन कप के गोल्डन बॉल विजेता, जूलियन ड्रेक्सलर को पीएसजी में नेमार की वजह से च्यादा मौका नहीं मिला, लेकिन वह भी अच्छे खिलाड़ी हैं। मार्क आंद्रेतर स्टेगेन ने बार्सिलोना के लिए गोलकीपर की अच्छी भूमिका निभाई। यहां विकल्प बहुत सारे हैं और सभी को अंतिम एकादश में जगह मिलना पक्का नहीं है।

सबसे बड़े मंच पर जीतने के अनुभव का विकल्प कुछ नहीं हो सकता और जर्मनी रूस 2014 के कुछ स्टार खिलाडय़िों के साथ पहुंचा है। थॉमस मूलर के विश्व कप का रिकॉर्ड अपनी कहानी खुद ही बयां करता है और एक बार टीम फिर से गोल के लिए उन पर निर्भर होगी। मेसुत ओजिल, टोनी क्रूस और सामी खेदिरा मिडफील्ड को मजबूत बनाते हैं। मैनुएल न्यूअर की चोट थोड़ी चिंता की बात है। अगर वह फिट होते हैं, तो वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर हैं। यह सब मिलकर जर्मनी को एक ऑलराउंड टीम बनाते हैं। बस उनके पास स्ट्राइकर नहीं है।

फिर आखिर इतनी संतुलित टीम 2016 के यूरो सेमीफाइनल में कैसे हार गई? हमने 1996 के बाद से इसे नहीं जीता है और यह एक लंबा समय है। सकारात्मक सोचूं तो टीम के प्रदर्शन में निरंतरता रही है। 2008 में उपविजेता, 2012 और 2016 में हम सेमीफाइनल तक पहुंचे। इसमें कोई शक नहीं है कि हम जीतना चाहते थे, लेकिन बुरे वर्षों में भी शीर्ष स्थान के आसपास रहने का काम दुनिया की कई टीमें नहीं कर पाई हैं। मेरे लिए निजी तौर पर विश्व कप का निराशाजनक अनुभव रहा है क्योंकि हम 2002 में फाइनल में हार गए थे। बलाक के निलंबित होने से हम थोड़े कमजोर हो गए थे, इसके बावजूद हमने संघर्ष किया। तब रोनाल्डो और रिवाल्डो की मौजूदगी से ब्राजील काफी मजबूत था। पिछले विश्व कप सेमीफाइनल में उन्हें 7-1 से हराना पिछली हार का बदला था, हालांकि उन्हें उस दिन नेमार के बिना खेलना पड़ा। ब्राजील हमारी सर्वश्रेष्ठ विपक्षी टीम है। फाइनल में फिर से उनका सामना करना बढिय़ा रहेगा। हमें वैसे भी उनसे पिछला हिसाब चुकाना है।

(लेखक जर्मनी के गोलकीपर रहे हैं।)

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By Sanjay Savern