(बाईचुंग भूटिया का विश्लेषण)

हीरो इंडियन सुपर लीग का चौथा संस्करण अधिकतर गोलकीपरों के लिए बहुत ज्यादा खास नहीं रहा। ऐसी बहुत सी गलतियां हुईं, जिसने मैच का पासा पलट दिया और यह गलतियां बहुत ही बचकानी थीं। हालांकि, यह समझ में आता है कि यह सब गलतियां खेल का हिस्सा हैं, लेकिन जब आप शीर्ष लीग में खेल रहे हो तो आपको बचकानी गलतियों से बचना चाहिए।

गोलकीपिंग एक मुश्किल काम है, जिसका बहुत ज्यादा श्रेय भी नहीं मिल पाता है। मगर मुझे लगता है कि आपके आत्मविश्वास और सोच पर काफी कुछ निर्भर करता है। एक ओर जहां इस गेम में दिन ब दिन युवा खिलाड़ी आ रहे हैं, सुब्रत पॉल अभी भी पुरानी शराब की तरह बेहतर होते जा रहे हैं। वह जिस ढंग से प्रत्येक मैच में उतरते हैं, उससे युवा खिलाड़ियों को सीखना चाहिए।

लीग में अब तक उनका प्रदर्शन शानदार रहा है और 22 दिसंबर तक खेले गए छह मैचों में से पांच में उन्होंने एक भी गोल नहीं खाया और सिर्फ एक मैच में गोल खाया। पहले चार मैचों में वह अपना रिकॉर्ड क्लीन रखने में कामयाब रहे और इससे जमशेदपुर एफसी अपनी लय पकड़ सका। इस वजह से कोच स्टीव कॉपेल को बैक में चार खिलाड़ी रखने का मौका मिल गया और जब पॉल अपने शीर्ष पर होते हैं, तो इसका फायदा टीम को होता ही है।

पॉल की प्रतिबद्धता, फिटनेस, खेल की भूख और अपने खेल को आगे बढ़ाने से उनके चरित्र का पता चलता है। वह हमेशा से ही एक लड़ाके रहे हैं और उनके अनुभव का इस्तेमाल करने के लिए मैं कोच कॉपेल को भी श्रेय देना चाहूंगा। जब आपके पास ऐसा शानदार प्रदर्शन करने वाला गोलकीपर हो तो इससे डिफेंडर्स और अन्य खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ जाता है। बेंगलुरु के खिलाफ उन्होंने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाते हुए कई अहम गोल बचाए। मेरे लिए वह इस मैच के मैन ऑफ द मैच थे और वह कई अन्य मैचों में इस पुरस्कार के हकदार थे। लीग में 11 खिलाड़ियों में छह भारतीय खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं, ऐसे में भारतीय गोलकीपरों को इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी छाप छोड़नी चाहिए। मुङो लगता है कि धीरज जैसे गोलकीपरों के लिए बेहतरीन मंच है। (टीसीएम)

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Posted By: Pradeep Sehgal

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