(बाईचुंग भूटिया, विश्लेषण)

हीरो इंडियन सुपर लीग के इस सत्र में सबसे अच्छी बात शुरुआती एकादश में छह भारतीयों को शामिल किए जाने का निर्णय रहा है। इससे युवा और प्रतिभाशाली भारतीय फुटबॉलरों को दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों के साथ और उनके खिलाफ खेलकर सीखने का मौका मिलता है। उन्हें मिला यह अनुभव भविष्य में भारतीय फुटबॉल के लिए बेहद अहम साबित होगा।

कई सालों से फुटबॉल की खूबसूरती इन्हीं हालात में छिपी हुई है जिनमें किसी स्टार फुटबॉलर का जन्म होता है। भारतीय फुटबॉल को भी इस लीग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमखम साबित करने के लिए ऐसे ही एक या अधिक स्टार खिलाड़ियों का इंतजार है। फुटबॉल के खेल में गोल करना सबसे महत्वपूर्ण है और जब तक आप ऐसा कर पा रहे हैं, कुछ और बात मायने नहीं रखती। हालांकि कई लोग गेंद को अधिक समय तक नियंत्रण में रखने को अहम मानते हैं, कई रणनीति और योजना को भी उतनी ही तवज्जो देते हैं मगर आप मैदान से बिना गोल किए खाली हाथ बाहर आते हैं तो फिर इन सब बातों का कोई मतलब नहीं रह जाता। अगर भारतीय फुटबॉल को आगे बढ़ना है तो हमें भारतीय फुटबॉलरों की जरूरत होगी। खासकर नए चेहरों की जो स्कोरिंग शीट पर अपना नाम दर्ज करा सकें। आंकड़े बताते हैं कि अब तक हुए 49 गोल में से भारतीय खिलाड़ियों ने केवल 11 गोल किए हैं। बेशक अभी काफी फुटबॉल खेली जानी बाकी है और मैं चाहूंगा कि भारतीय खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से इन आंकड़ों को बदल दें।

लाल्लीआनजुआला छंगटे, हितेश शर्मा, उदांता सिंह जैसे युवाओं ने अपनी गति और कौशल से प्रभावित किया है मगर स्कोरिंग पोजीशन में होने के बावजूद वे गोल करने में नाकामयाब साबित हुए हैं। यही वो जगह है जहां मैं सुधार होते देखना चाहता हूं। बतौर फॉरवर्ड खिलाड़ी आपको गोलपोस्ट के सामने निरंतर प्रयास करते रहने की जरूरत है। (टीसीएम)

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Posted By: Pradeep Sehgal

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