बाईचुंग भूटिया 

हीरो इंडियन सुपर लीग के चौथे संस्करण में चैंपियन बनने के लिए चेन्नइयन एफसी को बधाई। फाइनल में पांच गोल देखने को मिले और संभवत: यह आइएसएल के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ फाइनल था। दोनों टीमों ने अच्छी फुटबॉल खेली, लेकिन दुर्भाग्य से सिर्फ एक ही टीम विजेता हो सकती थी।

बेंगलुरु एफसी घरेलू मैदान में हारने के बाद निश्चित तौर पर निराश होगी। चेन्नइयन को पासा पलटने का श्रेय मिलना चाहिए, वह भी एक तरह से मेहमान टीम के तौर पर। ग्रुप चरण में भी उन्होंने यहां पर जीत दर्ज की थी। मुझे नहीं लगता कि बेंगलुरु को फाइनल में हारने पर निराश होना चाहिए। मैच के दौरान ऐसे मौके आते हैं जब आपको फायदा उठाना होता है, चेन्नई ने ऐसा ही किया।

मैच के दौरान लगाए गए दो हेडर ने पूरा मैच ही बदलकर रख दिया। इस तरह के गोल से आपमें जोश भरता है और आप में अतिरिक्त आत्मविश्वास जगता है। चेन्नयन ने निश्चित तौर पर बहुत अच्छा खेल दिखाया, लेकिन इन दो गोलों के बिना वे साधारण स्थिति से उबरते हुए चैंपियन नहीं बन सकते थे। शुरुआती एकादश में भारतीय खिलाडि़यों की संख्या पांच से छह होना बताता है कि भारतीय प्रतिभाओं को यह भरोसा दिला रहा है कि शीर्ष स्तरीय फुटबॉल कैसा होता है। भारतीय फुटबॉल को इससे निश्चित तौर पर फायदा होगा।

भारतीय खिलाडि़यों को अपनी—अपनी टीमों के लिए अहम मौकों पर गोल करते देखना भी अच्छा लग रहा है। सुनील छेत्री 14 गोल के साथ सबसे आगे रहे जबकि जेजे लालपेखुल्युआ नो गोल के साथ दूसरे नंबर पर रहे। मेरी नजर में एफसी गोवा सबसे प्रभावशाली टीम रही। सर्गियो लोबेरा के नेतृत्व में वे बेहद अच्छी आक्रामक फुटबॉल खेल रहे हैं, जो बेहद आसान दिखती है, लेकिन इसे अपनाना मुश्किल है। अगर वे इसे बैक में ज्यादा संगठित रख पाते, तो तस्वीर दूसरी हो सकती थी।

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Posted By: Ravindra Pratap Sing

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