मनोज वशिष्ठ, नई दिल्ली। ज़ी5 पर 12 मार्च को स्ट्रीम हुई वेब सीरीज़ 'कुबूल है 2.0' के साथ असद अहमद ख़ान और ज़ोया फ़ारुक़ी लौट आये हैं। इसके साथ कुछ और किरदार भी लौटे हैं, जिन्हें 'कुबूल है' के फैंस पहले से जानते होंगे। हालांकि, इस बार असद और ज़ोया की प्रेम कहानी की कथाभूमि अलग है। 'कुबूल है 2.0', कुछ साल पहले ज़ीटीवी पर प्रसारित हुए धारावाहिक 'कुबूल है' का वेब रूपांतरण है।

'कुबूल है' और 'कुबूल है 2.0' के बीच मुख्य फ़र्क यह है कि 'कुबूल है' जहां मुस्लिम सोशल ड्रामा था, जिसने समाज के प्रगतिशील चेहरे को पेश करने की कोशिश की थी, वहीं 'कुबूल है 2.0' उसी समाज की वतनपरस्ती के जज़्बे को उभारकर लाता है। दो दुश्मन देशों के तल्ख़ रिश्ते और साजिशों की बीच मोहब्बत की कसमसाहट भी 'कुबूल है 2.0' की कहानी का प्रमुख हिस्सा है। ओरिजिनल धारावाहिक की तरह वेब वर्ज़न में भी करण सिंह ग्रोवर और सुरभि ज्योति ने मुख्य किरदार निभाये हैं। 'कुबूल है 2.0' एक वेब सीरीज़ है, लिहाज़ा पहले सीज़न में असद और ज़ोया के रोमांस  की ज़मीन तैयार की गयी है। आने वाले सीज़ंस में इश्क़ परवान चढ़ेगा। हालांकि, यह इश्क़ आसां नहीं होने वाला। इसका अंदाज़ा दर्शकों को पहले सीज़न के क्लाइमैक्स में हो जाएगा। 

बहरहाल, 'कुबूल है 2.0' की कहानी कुछ इस प्रकार है...

असद अहमद ख़ान एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का राइफल शूटिंग चैम्पियन है। दिल्ली में वो अपनी मां दिलशाद और बहन नजमा के साथ रहता है। मगर, असद की सिर्फ़ यही पहचान नहीं है। उसकी शख़्सियत का एक ऐसा पहलू भी है, जिसके बारे में उसका परिवार भी नहीं जानता।  वहीं ज़ोया फ़ारुक़ी पाकिस्तान के रक्षा मंत्री जनरल बख्तियार फ़ारुक़ी की बेटी है।

असद और ज़ोया की बेलग्रेड में नाटकीय मुलाक़ात होती है, जहां असद एक शूटिंग चैम्पियनशिप में भाग लेने गया है, जबकि ज़ोया अपनी डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए गयी हुई है। जनरल बख्तियार ने ज़ोया की मां को कई साल पहले छोड़ दिया था, जिसके बाद ज़ोया अपनी मां के साथ लंदन में रहती है। शादी ज़ोया पारिवारिक दबाव में कर रही थी और ऐन मौक़े पर भाग जाती है, जिसमें उसकी मदद दोस्त सना शेख़ करती है।

कुछ नाटकीय घटनाक्रमों के बाद असद ज़ोया को उसके पिता के पास इस्लामाबाद पहुंचा देता है। जनरल बख्तियार के घर पर हमला होता है, जिसमें उनकी मौत हो जाती है। हालात ऐसे बनते हैं कि असद, ज़ोया के साथ निकाह के लिए तैयार हो जाता है। दोनों भारत के लिए रवाना होने ही वाले होते हैं कि ज़ोया का भाई हैदर एक ऐसा खुलासा कर देता है, जो असद और ज़ोया की प्रेम कहानी के लिए बहुत बड़ा संकट बनने वाला है।

कुबूल है 2.0 की कथा-पटकथा मृणाल अभिज्ञान झा की है। कहानी दिल्ली, बेलग्रेड और इस्लामाबाद के बीच घूमती है। चूंकि यह रोमांस की छौंक के साथ एक स्पाई सीरीज़ है, लिहाज़ा स्क्रीन प्ले में दृश्यों को उसी तरह से फैलाया गया है, ताकि सस्पेंस बना रहे और हर एपिसोड में दर्शक के सामने कुछ चौंकाने वाले खुलासे हों। कई ट्विस्ट्स और टर्न्स कहानी को रोचक बनाते हैं। ख़ासकर, पहले सीज़न का क्लाइमैक्स जिस मोड़ पर ख़त्म होता है, उससे दर्शक की बेचैनी बढ़ जाती है।

अभिनय की बात करें तो कम बोलने वाले, अनुशासित और संजीदा असद के किरदार में करण सिंह ग्रोवर ठीक लगे हैं। वहीं, बातूनी और बिंदास ज़ोया के किरदार को सुरभि ज्योति ने सफलता के साथ निभाया है। करण के साथ उनके दृश्य गुदगुदाते हैं। सीरीज़ की अच्छी बात यह है कि दोनों प्रमुख कलाकारों के बीच रोमांस की अतिरेकता नहीं की गयी है, जिससे कहानी भटकती नहीं। दोनों कलाकारों ने भी अपने भाव-प्रदर्शन को नियंत्रित अंदाज़ में पेश किया है। मंदिरा बेदी ने भारतीय खुफ़िया एजेंसी की मुखिया का किरदार निभाया है। मंदिरा के किरदार के लुक, गेटअप और चित्रण को अगर थोड़ा साधारण रखा जाता तो इसका असर अधिक होता।  

बाक़ी कलाकारों ने भी अपने किरदार और सीमाओं के अनुसार सधा हुआ काम किया है। हालांकि, कुछ दृश्यों में निर्देशकीय परिपक्वता की कमी झलकती है। प्रमुख किरदारों को छोड़कर कुछ सहयोगी कलाकारों का कमज़ोर अभिनय दृश्यों की संजीदगी को कम करता है। कुल मिलाकर 'कुबूल है' के फैंस के लिए यह सीरीज़ एक अलग विजुअल एक्सपीरिएंस है। 

कलाकार- करण सिंह ग्रोवर, सुरभि ज्योति, आरिफ़ ज़कारिया, लिलेट दुबे, शालिनी कपूर, मंदिरा बेदी आदि। 

निर्देशक- ग्लेन बरेटो, अंकुश मोहला

निर्माता- मृणाल, अभिज्ञान झा

स्टार- *** (3 स्टार)

Edited By: Manoj Vashisth