नई दिल्ली, जेएनएन। हिंदी सिनेमा में महिला किरदारों और कलाकारों को लेकर वक़्त के साथ एक जागरूकता आयी है। पर्दे पर कभी पेड़ों के इर्द-गिर्द नाचने और हीरो के साथ बस गलबहियां करने तक सीमित अभिनेत्रियां अब पूरे दम-ख़म के साथ मुख्य किरदारों में नज़र आ रही हैं। इसका बहुत बड़ा श्रेय लेखकों की उस नई जमात को जाता है, जो ऐसे दमदार किरदार लिख रहे हैं।

दैनिक जागरण ने एक्ट्रेसेज़ राउंड टेबल विषय पर 5 ऐसी अदाकाराओं से बात की, जो इस चुनौती को पूरी शिद्दत से स्वीकार कर रही हैं और हिंदी सिनेमा की एक्ट्रेस को उस घिसे-पिटे खांचे से बाहर खींच रही हैं। हिंदी सिनेमा में नायिका के इस उदय पर जागरण न्यू मीडिया की हेल्थ एंड लाइफ़स्टाइल हेड मेघा ममगई ने रसिका दुग्गल, शहाना गोस्वामी, अक्षा पर्दसानी, अदिति पोहनकर और तान्या मानिकताला से विस्तृत बात-चीत की।

नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म अपनी कहानियों के ज़रिए नारीत्व के विभिन्न पहलुओं क सामने ला रहे हैं। पिछले हफ़्ते नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुईं अ सूटेबल बॉय और मिर्ज़ापुर 2 सीरीज़ में महिला किरदारों के इस दबदबे को साफ़ महसूस किया जा सकता है।

(अ सूटेबल बॉय में लता और रसिका। फोटो- पीआर)

अ सूटेबल बॉय की लता बदलते राजनीतिक परिवेश में अपनी मौजूदगी का एहसास हर पल करवाती है। यह किरदार न्यूकमर तान्या मानिकताला ने निभाया। वहीं, मीनाक्षी के किरदार में शहाना गोस्वामी, सईदा बेगम के रोल में तब्बू और रूपा मेहरा के किरदार में माहिरा कक्कड़ (भारतीय-अमरीकी कलाकार) को सीरीज़ में छा जाने का पूरा मौक़ा मिलता है। अ सूटेबल बॉय, विक्रम सेठ के इसी शीर्षक से आये नॉवल पर आधारित 6 एपिसोड्स की सीरीज़ है, जिसे मीरा नायर ने निर्देशित किया है।

इससे पहले बुलबुल, डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे, फोर मोर शॉट्स प्लीज़ जैसी सीरीज़ महिलाओं को लेकर अलग नज़रिया पेश करती हैं। अ सूटेबल बॉय और मिर्ज़ापुर 2 में नज़र आयीं रसिका दुग्गल से जब दैनिक जागण ने एक्ट्रेसेज़ राउंड टेबल में इस पर बात की तो उन्होंने कहा- यह समझना बड़ा मुश्किल है कि दर्शक किसी कंटेंट को कैसे लेते हैं। उनकी अपनी सोच और पूर्वाग्रह होते हैं। वो प्लेटफॉर्म पर वो कंटेंट के लिए आते हैं, जो उनके लिए हम क्रिएट करते हैं।

मिर्ज़ापुर 2 में अपने किरदार को लेकर रसिका कहती हैं- ''जब कभी मैं अपने किसी सीन की तैयारियों के लिए संदर्भ ढूंढती हूं तो ख़ुद से ही कहती रहती हूं, यह नहीं, इस तरह नहीं, क्योंकि कई बार महिलाओं के दृश्य इस तरह लिखे या दिखाये जाते हैं, जो उनमें कामुकता की परत ले आता है।''

(अ सूटेबल बॉय में शहाना। फोटो- पीआर)

शहाना गोस्वामी समाज में आ रहे बदलावों को ऐसी कहानियां के लिए ज़िम्मेदार मानती हैं। वो कहती हैं- ''अब अधिक महिलाएं लेखक, निर्देशक और तकनीशियनों के रूप में इंडस्ट्री में आ रही हैं। अब वैश्विक स्तर पर समावेशी कहानियों के लिए दरवाज़ें खुले हैं। अच्छी बात यह है कि दर्शक उन्हें सुनना और देखना चाहते हैं।''

अ सूटेबल बॉय की तान्या मानिकताला कहती हैं कि यह नये कलाकारों के लिए इंडस्ट्री में अच्छा समय है। विभिन्न कहानियां गढ़ी जा रही हैं, जो कलाकारों को भिन्न दिखने में मदद करता है। नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म क्रिएटर्स को ऐसी कहानियां दिखाने की अनुमति देते हैं, जो वास्तवित किरदारों के क़रीब हों।

(शी में अदिकि पोहनकर। फोटो- पीआर)

नेटफ्लिक्स की शी की नायिका अदिति पोहनकर एमएक्स प्लेयर की आश्रम में भी नज़र आयीं। अदिति ने कहा- ''हर किरदार मॉडल की तरह नहीं दिख सकता। यह कोई सौन्दर्य प्रतियोगिता नहीं है। कॉप के किरदार में मैं ब्यूटी पेजेंट की विनर जैसी नहीं दिख सकती। किरदार कहीं खो ना जाएं, इसलिए क्रिएटर्स अब छवि का पीछा नहीं करते। जो कि अच्छा है।''

(जामतारा में अक्षा। फोटो- पीआर)

नेटफ्लिक्स की जामतारा में पुलिस अफ़सर का रोल निभाने वाली अक्षा पर्दसानी कहती हैं कि कोई मुकम्मल नहीं है। दर्शकों का भी अब उदय हो रहा है और वो ऐसे किरदार देखने में दिलचस्पी रखते हैं, जो उनकी तरह दोषपूर्ण हैं या उनसे अधिक हैं। मेरे लिए हीरोइन की परिभाषा यही है।

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