प्रियंका सिंह, मुंबई। 'बारिश' वेब सीरीज के बाद आशा नेगी वूट की नई सीरीज 'ख्वाबों के परिंदे' में नजर आईं हैं। इसमें आशा अपने टीवी किरदारों से अलग ग्लैमरस अंदाज में दिखीं। नए लुक, टीवी पर काम की योजनाओं और प्यार में दोबारा यकीन रखने को लेकर उनस बातचीत के अंश:

सास-बहू वाले शोज से अलग आप ग्लैमरस अवतार में नजर आ रही हैं। सोचा-समझा निर्णय था कि अब इमेज बदलनी हैं?

(मुस्कराते हुए) हां, बिल्कुल, अब तक मैं अपनी जो छवि दिखा रही थी, वह धोखा था। धीरे-धीरे हिम्मत बढ़ा रही हूं। वास्तविक पहलू दिखा रही हूं। बढ़ती उम्र के साथ आपमें बदलाव आते हैं। जीवन में क्या चाहिए, क्या नहीं, वह महसूस होता है। अनुभवों से आत्मविश्वास बढ़ता है। मैं बहुत हद तक इस शो के किरदार जैसी हूं। मैं वह रोल नहीं करना चाहती हूं, जिसमें मैं सिर्फ अच्छी और सच्ची नजर आती हूं। मैं इंसान हूं और मुझमें भी कमियां हैं। परफेक्टकिरदारों के बजाय ऐसे किरदार जो जिंदगी के करीब होते हैं, खामियों और खूबियों के साथ होते हैं, उन्हें निभाने से अपनी कला में दिलचस्पी बनी रहती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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यह शो मेलबर्न से पर्थ तक के सफर पर बना है। इसकी शूटिंग कब की गई थी?

महामारी से पहले ही शूटिंग हुई थी। हम चार कलाकारों को एक गाड़ी और घर दे दिया गया था। सफर करना था, कई बार हास्टल्स में रहना पड़ा। हमने वहां आपस में चीजें शेयर करना सीखा। कई बार मनमुटाव हो जाता था, लेकिन एक परिवारिक माहौल भी बन गया था। हमने मेलबर्न से पर्थ तक सफर के अलावा भी काफी ट्रैवल किया। हम सफर के दौरान प्रकृति के बीच थे। दोस्तों और परिवार से मैं दूर थी। इस शो के सफर के दौरान ही हम कलाकारों की दोस्ती हुई। हम सभी अपने कंफर्ट जोन से बाहर थे। भारतीय खाना नहीं मिल रहा था। जब भारतीय खाना मिला तो बहुत ही स्वादिष्ट लगा। ये सब चीजें आपको बेहतर इंसान बनाती हैं। आप चीजों के साथ तालमेल बिठाना सीख जाते हैं। इस शो को करने के बाद आत्मविश्वास बढ़ा है। शायद मैं आने वाले दिनों में अकेले सफर पर जाऊंगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

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आपने कहा कि एक उम्र बढऩे के बाद बदलाव आता है, वह बदलाव आपमें क्या रहें हैं?

(थोड़ा ठहरकर, सोचकर) पहले मुझे लगता था कि जब मैं 30 की हो जाऊंगी तो क्या होगा। अब मैं 30 की उम्र पार कर चुकी हूं। ऐसा लगता है कि हर दिन के साथ और बेहतर हो रही हूं, विकसित हो रही हूं। मेरी जरूरतें पहले के मुकाबले कम हो गई हैं। सही और गलत में अंतर समझ पाती हूं। आप लगातार डिजिटल पर काम कर रही हैं।

टेलीविजन पर काम करने की कोई योजना है?

मुझे सिर्फ अच्छा काम करना है। फिर वह काम चाहे फिल्मों, डिजिटल प्लेटफार्म पर या फिर टीवी में मिले। मुझे टीवी पर काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। कहानी अगर अच्छी होगी और शो छह-सात महीने में खत्म हो जाएगा तो मैं करना चाहूंगी। दो-तीन साल तक चलने वाले शोज फिलहाल नहीं करना चाहती हूं। भले ही शो में मैं लीड न रहूं, लेकिन वह किरदार अहम होना चाहिए, जिसे शो खत्म होने के बाद भी लोग याद रखें।

 

 

 

 

 

 

 

 

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आप एक रिश्ते से बाहर निकल चुकी हैं। क्या अब दोबारा प्यार की तलाश है?

नहीं, फिलहाल मैं प्यार की तलाश में नहीं हूं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि प्यार दोबारा नहीं करना हैै। मुझे प्यार में अब भी भरोसा है। प्यार में किसी के साथ रहने पर खुशी मिलती है। वह एहसास बना रहना चाहिए। अगर जिंदगी में प्यार दोबारा आता है तो उसे अपनाऊंगी।

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