ब्रांड डेस्क। दर्द या सरदर्द है तो उससे तुरंत राहत पाना चाहिए, ताकि व्यक्ति जीवन का आनंद उठा सके और दर्द के तीव्र या असहनीय होने का इंतजार न करना पड़े। लेकिन बहुत लोग ऐसे भी हैं, जो अपने दर्द को छुपाते हैं। शायद उन्हें लगता है कि अगर वे अपने दर्द को अपने प्रियजनों के साथ साझा करेंगे तो यह उन्हें कमजोर बना देगा। वह खुद को साहसी और दिलेर दिखाना चाहते हैं।

यही बात हमारे लिए एक चर्चा का विषय है कि साहसी दिखने के लिए हम अपने दर्द या सरदर्द को क्यों छुपाते हैं?

भारतीय शहरी युवाओं के बीच दर्द छुपाने की एक आदत बन गई है, जो अपनी नौकरी, परिवार, स्वास्थ्य के बारे में तनावग्रस्त हैं और इसके बारे में बात करने में असमर्थ हैं। इस चीज पर Saridon ब्रांड ने गौर किया और इसी को आधार बनाकर इन्होंने हाल ही में एक कैंपेन लॉन्च किया, जिसका नाम है- ‘सरदर्द छुपाओ नहीं, मिटाओ’। इस अभियान ने सरदर्द से राहत पाने के लिए लोगों को प्रेरित किया। तनाव के समय सरदर्द होना लाजमी है। इस दर्द को सहना औरउस पर कार्रवाई न करना किसी के लिए भी ठीक नहीं है।

Saridon के साथ मिलकर जागरण न्यू मीडिया एक वेबिनार का आयोजन कर रहा है, जिसका शीर्षक है, #NoMoreHidingHeadaches। इस वेबिनार में भाग लेने और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए बायर इंडिया कंज्यूमर हेल्थ डिवीजन के कंट्री हेड और प्रवक्ता संदीप वर्मा और मंनोरजन की दुनिया से आने वाली अभिनेत्री त्रिधा चौधरी और अभिनेता ऋत्विक धनजानी को आमंत्रित किया गया है।

इस वेबिनार में निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी

1. तनाव और चिंता के कारण क्या महामारी में सरदर्द की समस्या बढ़ी है?

2. कैसे Saridon ने अपने नए अभियान ‘सरदर्द छुपाओ नहीं, मिटाओ’ के माध्यम से युवा (22-35 साल के महिला पुरुष) भारतीयों के बीच अपनी एक पहचान बनाई है?

3. ‘द सेरिडॉन हेडेक रिपोर्ट’ की क्या है इनसाइट?

4. हेडेक यानी सरदर्द के भावनात्मक और शारीरिक प्रभाव क्या है और हेल्थकेयर से जुड़े ब्रांडो को उपभोक्ताओं की भावनात्मक जरूरतों को समझने की आवश्यकता क्यों है?

वित्तीय चिंता, नौकरी की सुरक्षा, काम का दबाव, पारिवारिक चिंता आदि जैसे तनाव पैदा करने वाले कारक कोरोना से पहले मौजूद थे, लेकिन महामारी ने इसे बढ़ाने का काम किया है। आज खुद के स्वास्थ्य को बेहतर करना लोगों की चिंता का मुख्य कारण है। इस सब के परिणामस्वरूप लोगों के मानसिक और भावनात्मक तनाव पर भारी असर पड़ा है, जिससे विभिन्न लक्षण सामने आए हैं, जिनमें से एक प्रमुख कारण तनाव से होने वाला सरदर्द में वृद्धि है।

दर्द को छुपाने के बजाय उस पर कार्रवाई करें जैसे अपने उद्देश्य से प्रेरित संदेश फैलाने के लिए प्रतिष्ठित जिंगल ‘Sirf Ek Saridon’ के जरिए Saridon अपनी पांच दशक लंबी विरासत को आगे ले जा रहा है। एक व्यापक सर्वेक्षण के माध्यम से पता चला है कि उपभोक्ता, युवा, महत्वाकांक्षी और मेहनती पुरुष और महिलाएं, जिनकी आयु 22-35 के बीच है और जो शहरों में रहता है तथा अपनी जिम्मेदारियों से लदा हुआ है, उनमें तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिसमें सरदर्द भी शामिल है। हालांकि, वे दर्द को साझा करने या इसके लिए दवा लेने के बजाय चुपचाप सहन करना पसंद करते हैं, क्योंकि वे अपने प्रियजनों को तनाव में नहीं देखना चाहते।

इस चर्चा के माध्यम से प्रमुख एनाल्जेसिक OTC ब्रांड Saridon रोग से लड़ने वाले भारतीयों से दर्द पर त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह करते हुए सरदर्द के विषय पर बातचीत का नेतृत्व करना चाहता है। अधिक उद्देश्यपूर्ण स्तर पर, लोगों को अपने तनाव और सरदर्द को ‘Sirf Ek Saridon’ के साथ साझा करने के लिए कह कर दबाव कम करें। 

वेबिनार से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें:

Note - यह आर्टिकल ब्रांड डेस्‍क द्वारा लिखा गया है।

Edited By: Priti Kushwaha