Vibe Movie Review: थिएटर में दर्शकों की वाइब बदल देगी कुणाल खेमू की फिल्म, कॉमेडी के साथ उलझे जासूसी दांव
कुणाल खेमू की फिल्म वाइब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में अभिनय के साथ-साथ उन्होंने इसका निर्देशन भी ...और पढ़ें

वाइब मूवी रिव्यू/ फोटो- जागरण ग्राफिक्स
HighLights
सिनेमाघरों में रिलीज हुई कुणाल खेमू की वाइब
हंसी की वाइब के साथ उलझे हुए जासूसी दांव
दर्शकों को पसंद आएगी सितारों की वाइब
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। फिल्म मडगांव एक्सप्रेस के बाद अभिनेता कुणाल खेमू ने अपनी दूसरी निर्देशित फिल्म वाइब के साथ एक बार फिर निर्देशन की कमान संभाली है। इस बार उन्होंने जासूसी और कॉमेडी का मेल किया है। फिल्म में रहस्य, रोमांच और एक्शन तो है, लेकिन कुणाल ने इसे तनावपूर्ण बनाने के बजाय हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया है।
क्या है वाइब की कहानी?
कहानी बचपन के दो दोस्तों भागीरथ भार्गव यानी बग्स (स्पर्श श्रीवास्तव) और हार्दिक (कुणाल खेमू) के इर्दगिर्द है। हार्दिक, भागीरथ से चार साल बड़ा है। दोनों के व्यक्तित्व एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, लेकिन उनका रिश्ता भाइयों जैसा है। भागीरथ एक अग्रणी टेक कंपनी में काम करता है। वह कंपनी एक खास सॉफ्टवेयर तैयार कर रही है। दूसरी ओर, हार्दिक लंबे समय तक रिहैब में रहने के बाद मुंबई लौटा है। उसकी पढ़ाई सॉफ्टवेयर से जुड़ी है, लेकिन अनुभव मार्केटिंग और विज्ञापन के क्षेत्र का है।
भागीरथ अपनी कंपनी में ही हार्दिक को काम दिलाने में मदद करता है। पहले ही दिन हार्दिक नई इंटर्न करीना (वंशिका धीर) की ओर आकर्षित हो जाता है। उनकी प्रेम कहानी आगे बढ़ती, उससे पहले ही कहानी एक अप्रत्याशित मोड़ लेती है। करीना की असली पहचान सामने आती है और हार्दिक तथा भागीरथ एक खतरनाक आतंकी संगठन के निशाने पर आ जाते हैं। उधर, खुफिया एजेंसी टैक्टिकल सिक्योरिटी यूनिट (टीएसयू) की प्रमुख मैडम एच (प्रिटी जिंटा) को सूचना मिलती है कि कुख्यात आतंकी भारत में ऑपरेशन बेनकाब की तैयारी में हैं।

घटानाक्रम नया मोड़ लेता हैं और हार्दिक और भागीरथ को देश की रक्षा की खातिर एक मिशन पर भेजा जाता है। ऑपरेशन बेनकाब वास्तव में क्या है? दोनों दोस्तों को इस मिशन में शामिल करने की वजह क्या है? कहानी इसी रहस्य के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है।
साधारण कहानी को कुणाल ने बनाया रोचक
कुणाल खेमू ने फिल्म में अभिनय करने के साथ इसकी पटकथा और संवाद भी लिखे हैं। वह इसके सह-निर्माता भी हैं। यहां तक कि फिल्म के क्रेडिट में ‘गेस्ट म्यूजिक कंपोजर’ और गीतकार के रूप में भी उनका नाम शामिल है। इस तरह वाइब पूरी तरह कुणाल खेमू की रचनात्मक छाप वाली फिल्म बन जाती है। ओपनिंग क्रेडिट के समय दो आवाजों के बीच स्पेशल थैंक्स और सहयोगी संस्थाओं की लंबी सूची को लेकर होने वाली बातचीत दर्शकों को फिल्म के व्यंग्यात्मक और शरारती मिजाज की झलक दे देती है।
यही हास्य फिल्म के अंत तक अलग-अलग रूपों में सामने आता रहता है। हालांकि, फिल्म का आधार भले ही बहुत नया नहीं है, लेकिन इसकी पटकथा और मनोरंजन का स्तर एक साधारण कहानी को भी रोचक बना देते हैं। खासकर मध्यांतर से पहले हिस्से में संवाद, आपसी बातचीत और कॉमिक सिचुएशन काफी प्रभावी हैं। इंटरवल के बाद फिल्म का टोन बदल जाता है और कहानी में एक्शन, आतंकवाद तथा जासूसी का हिस्सा अधिक प्रमुख हो जाता है। यहीं पटकथा थोड़ी उलझने लगती है।

कई घटनाएं जानी-पहचानी जासूसी फिल्मों की याद दिलाती हैं। उदाहरण के लिए, सिपाही 1 नाम की गोली का इस्तेमाल, जो हार्दिक को अचानक एक खतरनाक सैनिक में बदल देती है, या क्लाइमेक्स में किसी अप्रत्याशित किरदार की एंट्री से स्थिति का बदल जाना। क्लाइमेक्स का एक्शन सीन भी काफी लंबा हो गया है।
संगीत दृश्यों के साथ कॉमेडी को मजबूत बनाता है
तकनीकी स्तर पर भी फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर उसके माहौल के अनुरूप हैं। अमित त्रिवेदी का समकालीन और थोड़ा अलग तरह का संगीत फिल्म की विचित्र दुनिया के साथ मेल खाता है। वहीं जॉन स्टीवर्ट एडुरी का बैकग्राउंड स्कोर एक्शन दृश्यों के साथ-साथ कॉमेडी को भी मजबूती देता है। परवेज शेख की एक्शन कोरियोग्राफी अच्छी है।
कुणाल खेमू-निरहुआ सहित सितारों ने की दमदार एक्टिंग
कलाकारों में कुणाल खेमू की कॉमिक टाइमिंग शानदार है। फिल्म का भार उनके कंधों पर है। उन्होंने अभिनय के साथ बाकी विभागों को भी जिम्मेदारी के साथ संभाला है। स्पर्श श्रीवास्तव ने बग्स के किरदार में गंभीरता, जिम्मेदारी और मासूमियत का दिलचस्प संतुलन कायम किया है। उसकी सहजता और घबराहट कई हास्यपूर्ण स्थितियां पैदा करती हैं। कुणाल खेमू के साथ उनकी केमिस्ट्री जमती है।

दोनों की नोकझोंक और जासूस बनने की ट्रेनिंग से जुड़े दृश्य दिलचस्प हैं। वंशिका धीर ने अपनी पहली फिल्म में अच्छा प्रभाव छोड़ा है। वह किरदार के अनुरुप मासूम लगी हैं। मैडम एच के किरदार में प्रिटी जिंटा का पात्र उनके पिछले किरदारों से काफी अलग है। यहां उन्हें एक्शन करने का भी मौका मिला है। हालांकि, कुछ एक्शन दृश्यों में उनका बॉडी डबल साफ नजर आता है। यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने खुफिया अधिकारियों की भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से निभाया है। शर्मिला टैगोर का कैमियो सुखद सरप्राइज की तरह सामने आता है।
कुल मिलाकर, वाइब मनोरंजक और हल्के-फुल्के अंदाज वाली जासूसी कॉमेडी है। आखिर में सीक्वल की संभावना भी साफ नजर आती है।
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