स्मिता श्रीवास्‍तव, मुंबई। The Matrix Resurrections Review : वर्ष 1999 में रिलीज साइंस फिक्‍शन एक्‍शन थ्रिलर हॉलीवुड फिल्‍म 'द मैट्रिक्‍स रिसरेक्शंस' का विषय काफी नया, रोचक और अपने समय से आगे का था। लाना और उनकी बहन लिली वाचोवस्की ने वीडियो गेम डिजायनर थॉमस एंडरसन उर्फ नियो (कियानो रीव्स) और ट्रिनिटी (कैरी एन मॉस) के जरिए एक ऐसी दुनिया से परिचित कराया जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मनुष्य सह-अस्तित्व के लिए लड़ते हैं। उसमें नीली और लाल गोली में किसी एक को चुनने का विकल्‍प आज भी यादगार है। उसके बाद वर्ष 2003 में इस फ्रेंचाइज की दो फिल्‍में द मैट्रिक्‍स रीलोडेड और द मैट्रिक्‍स रिवोल्‍यूशंस आई। करीब 18 साल के अंतराल के बाद इस फ्रेंचाइज की चौथी फिल्‍म द मैट्रिक्‍स रिसरेक्शंस सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।

लाना वाचोवस्की निर्देशित द मैट्रिक्‍स रिसरेक्शन्स में नियो बेचैन, उदास और अधेड़ उम्र में नजर आता है, जो एक कंपनी में थॉमस एंडरसन के तौर पर काम कर रहा है। उसके अंदर रियल और वर्चुअल वर्ल्‍ड को लेकर कशमकश रहती है। उसे अपनी पिछली जिंदगी बिल्‍कुल याद नहीं है। वह एक काफी शॉप में ट्रिनिटी को देखता है। ट्रिनिटी को भी अपनी पिछली जिंदगी याद नहीं है। उसका अपना परिवार है। उसे बाइक चलाने का शौक है। क्‍या दोनों एकदूसरे से परिचित हैं? नियो अपनी पिछली जिंदगी में कैसे लौटेगा? ट्रिनिटी से मिलने के लिए उसे किन मुश्किलों से गुजरना होगा ऐसे कई प्रसंगों के ईदगिर्द कहानी गढ़ी गई है।

'द मैट्रिक्‍स रिसरेक्शंस' में फ्रेंचाइज की पूर्ववर्ती फिल्‍मों के अंश भी शामिल हैं, जिसके जरिए इतने लंबे अंतराल की दूरी को पाटने की कोशिश की गई है। हालांकि इस बार मशीनों और इंसानों के बीच लड़ाई पर ज्‍यादा फोकस नहीं है बल्कि नियो और ट्रिनिटी की रोमांचक प्रेम कहानी पर है। इस बार भी किरदार लंबे ट्रेंच कोट में नजर आते हैं, चकमा देने वाले दृश्‍य और मशीनों की दुनिया है जो पूर्ववर्ती फिल्‍मों की याद को ताजा करती है। इस बार मैट्रिक्‍स रिसरेक्शन्स का निर्देशन अकेले लाना वाचोवस्की ने किया है। वह सहलेखक भी हैं। लाना ने इस बार भी इंसान और मशीन के बीच के मतभेद की जटिल दुनिया को गढ़ने का प्रयास किया है पर किरदार इस बार दमदार नहीं बन पाए हैं। उसके अलावा यह पुरानी यादों पर काफी निर्भर है। खास तौर पर शुरुआती हिस्‍सा जब थॉमस अपने जटिल जीवन को नियो के साथ जोड़ने की कोशिश करता है, जिसमें पिछली फिल्‍मों के कई फ्लैशबैक सीन शामिल हैं। इसमें प्रशंसकों को उनके पसंदीदा द मैट्रिक्स के सितारे मारफिस (लॉरेंस फिशबर्न) और एजेंट स्मिथ (ह्यूगो वीविंग) का फुटेज देखने को मिलता है। इस बार एक्‍शन मूल फिल्‍म की तरह रोमांचक और शानदार नहीं बन पाया है। उसे ज्‍यादा स्‍पेस भी नहीं दिया गया है, जोकि मूल कहानी का सबसे आकर्षक और अहम पहलू था। हालांकि इतने लंबे अंतराल के बाद भी कियानो और कैरी एन मॉस अपने किरदारों में पूरी तरह सहज और रमे हुए नजर आते हैं। भले ही लेखन के स्‍तर पर फिल्‍म में कुछ खामिंया हैं, लेकिन दोनों की केमिस्‍ट्री शानदार लगती है। इस बार कथानक में थॉमस पर ज्‍यादा जोर दिया गया है इसलिए नियो के कायातंरण में उसे देखने के लिए लेखक निर्देशक ने काफी इंतजार करवाया है। बग्‍स की भूमिका में जेसिका हेनविक प्रभावित करती हैं। फिल्‍म में प्रियंका चोपड़ा की दिलचस्प भूमिका है। हालांकि उनकी भूमिका सीमित है, लेकिन कलाकारों की भीड़ में वह अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाब रहती हैं।

द मैट्रिक्स रिसरेक्शन्‍स की सबसे बड़ी खूबी डेनियल मस्‍सेसी और जॉन टोल की सिनेमटोग्राफी है जो फिल्‍म को आकर्षक बनाती है। उसके लिए उन्‍हें प्रोडक्‍शन डिजाइनर ह्यूग बेटअप और पीटर वालपोल का पूरा सहयोग मिला है।

फिल्‍म रिव्‍यू : द मैट्रिक्‍स रिसरेक्शंस

प्रमुख कलाकार : कियानो रीव्स, कैरी एन मॉस, जेसिका हेनविक, प्रियंका चोपड़ा

निर्देशक : लाना वाचोवस्की

अवधि : 148 मिनट

स्‍टार : ढाई

Edited By: Priti Kushwaha