-पराग छापेकर

स्टारकास्ट: अभय देओल, पत्रलेखा, मनु ऋषि, बिजेंद्र काला, मनोज पाहवा, हिमानी शिवपुरी आदि।

निर्देशक: फ़राज़ हैदर

भूत एक ऐसा विषय है जो फ़िल्मकारों को हमेशा से लुभाते आये हैं क्योंकि भूत से वह हर चीज करवाई जा सकती है जो बड़े पर्दे पर बहुत ही सिनेमाई लगे। लेकिन, डायरेक्टर फ़राज़ हैदर की फ़िल्म ‘नानू की जानू’ में भूत का एक अलग अंदाज़ नज़र आता है।

यह कहानी है नानू (अभय देओल) की जो दिल्ली में लोगों के मकानों पर अवैध कब्जा करता है। यही उसका धंधा है। इस काम में उसके मित्र दब्बू (मनु ऋषि) और 90 (दीपक शर्मा) उसका साथ देते हैं। एक दिन नानू के साथ कुछ अजीब-अजीब सी घटनाएं होने लगती है और जब उसकी जड़ में जाया जाता है तो पता चलता है कि नानू के पीछे एक भूतनी (पत्रलेखा) पड़ गई है। वो भूतनी नानू से प्यार करने लगी है! इसके आगे क्या होगा? क्या अनुज भूतनी से पीछा छुड़ा पायेगा? आखिर नानू के पीछे भूतनी क्यों पड़ी है? इसी ताने-बाने पर बनी है फ़िल्म –‘नानू की जानू’।

अभय देओल एक मंझे हुए कलाकार हैं और वह जिस तरह की फ़िल्में करते हैं उन्होंने एक अपना अलग दर्शक वर्ग बनाया हुआ है। ‘नानू की जानू’ के साथ अभय देओल ने लंबी चुप्पी तोड़ी है तो जाहिर है उनके चाहने वालों के लिए तो ‘नानू की जानू’ उत्सुकता का विषय है। 

निर्देशक फ़राज़ हैदर ने एक कमर्शियल और मनोरंजक फ़िल्म बनाई है! पूरी फ़िल्म बहुत अच्छे से चलती है। कहीं आप मुस्कुराते हैं तो कहीं ठहाके लगाते हैं मगर, क्लाइमेक्स पर आकर फ़िल्म थोड़ी बचकाना हो जाती है। हालांकि फ़राज़ ने क्लाइमेक्स में आकर फ़िल्ममेकर की जिम्मेदारी को समझते हुए अपना काम किया है मगर वह फ़िल्म के टेक्सचर से अलग हो जाने के कारण प्रभाव नहीं छोड़ पाता!

अभिनय की बात करें तो अभय देओल हमेशा की तरह पूरे फॉर्म में नज़र आये हैं और पत्रलेखा का रोल कम था लेकिन, उन्होंने अपना काम ईमानदारी से किया है। मनु ऋषि पूरी तरह छाए रहे। बृजेन्द्र काला और मनोज पाहवा थोड़ी देर के लिए आते हैं मगर सचिन-सहवाग की तरह चौके-छक्के लगाकर चले जाते हैं! मां के किरदार में हिमानी शिवपुरी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती हैं! नानू के दोस्तों में 90 के किरदार में दीपक शर्मा भी ध्यान खींचते हैं।

कुल मिलाकर ‘नानू की जानू’ इस हफ्ते की कमर्शियल ज़ोन में रिलीज़ होने वाली एक मात्र फ़िल्म है जो आप देख सकते हैं और भूतिया प्यार के मजे ले सकते हैं। यह कोई एक्स्ट्राऑर्डिनरी फ़िल्म तो नहीं मगर एक बार देखी जा सकती है।

जागरण डॉट कॉम रेटिंग: पांच (5) में से ढाई (2.5) स्टार

अवधि: 2 घंटे 13 मिनट

By Hirendra J