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Mahaprabhu Jagannath Review: भक्ति, आस्था और अहमासुर के घमंड के अंत की महागाथा, पढ़ें रिव्यू

By Smita SrivastavaEdited By: Rinki Tiwari
Published: Fri, 04 Sep 2026 04:41 PM (GMT+05:30)

Mahaprabhu Jagannath Film Review: महावतार नरसिम्हा के बाद महाप्रभु जगन्नाथ पर बनी फिल्म आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। पढ़िए इसका रिव्यू...

महाप्रभु जगन्नाथ का रिव्यू।

महाप्रभु जगन्नाथ का रिव्यू।

HighLights

  1. महावतार नरसिम्हा के बाद आई महाप्रभु जगन्नाथ

  2. अहंकार के अंत की महागाथा दिखाती है फिल्म

  3. श्रीपद वर्खेडकर ने किया है फिल्म का निर्देशन

स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। कई विवादों के बाद एनिमेशन फिल्‍म महाप्रभु जगन्नाथ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्‍म में महाप्रभु की भक्‍त वत्‍सलता को दिखाने का प्रयास किया गया है। यह फिल्‍म कई पौराणिक कथाओं से प्रेरणा लेकर बनाई गई है, जिसमें दर्शाया गया है कि भगवान अपने भक्‍तों के लिए किसी भी सीमा को पार कर सकते हैं।

एनिमेशन माध्यम होने के कारण कल्पनाओं और पौराणिक प्रसंगों को भव्य विजुअल्स के जरिए पर्दे पर उतारने का प्रयास किया गया है।

क्या है कहानी?

कहानी 15वीं शताब्‍दी के मध्‍य में गुरु योगेश्‍वर के आश्रम में मेधावी शिष्‍य अहम कुमार से आरंभ होती है। अहम कुमार की रुचि ऐसी कहानियों में होती है जो सृष्टि का उल्‍लंघन करते हैं। शिक्षा पूरी करने के बाद अहम यात्रा पर निकलता है ताकि भगवान को बेहतर तरीके से जान सके कि वाकई भगवान इतने गुणी है कि सब उनका गुणगान करते हैं। उसकी यात्रा का अंत जगन्नाथ पुरी में होता है, जहां उसके साथ कुछ ऐसा होता है कि वह महाप्रभु जगन्नाथ को अपना शत्रु घोषित कर देता है।

उधर, पांच साल के बालक बलराम को उसके माता-पिता जन्‍मदिन पर प्रभु जगन्नाथ की मूर्ति तोहफे में देते हैं। वह जगन्नाथ की सेवा अर्चना करता है। कठिन समय में भगवान उसकी रक्षा करते हैं। दोनों मित्रवत रहते हैं। फिर अचानक से भगवान के भक्‍तों का कोई अपहरण करने लगता है। बलराम के माता-पिता और पूरे गांववासियों का भी अपहरण हो जाता है। भगवान जगन्नाथ भी परेशान होते है।

Mahaprabhu Jagannath

वह अपने वाहन गरुड़ के साथ इसकी खोज में जुटते हैं। बलराम भी उनकी यात्रा में साथ आता है। फिर पता चलता है कि अहम कुमार भगवान ब्रह्मा से वरदान लेकर ताकतवर और अत्‍याचारी अहमासुर बन चुका है। उसने अपना अहम लोक बना लिया है। अपहरण के पीछे उसका ही हाथ है।

वह भगवान जगन्नाथ के भक्‍तों से जबरन अपनी पूजा करवाता है। उसका मकसद सिर्फ भक्तों पर नियंत्रण करना नहीं, बल्कि पूरी धरती पर अपना प्रभुत्व कायम करना और दैवी व्यवस्था को चुनौती देना है। भगवान जगन्नाथ किस प्रकार अपने भक्‍तों की रक्षा करते हैं और उसका संहार करते हैं फिल्‍म इस संबंध में हैं।

कैसा है फिल्म का वीएफएक्स?

पिछले साल एनिमेशन फिल्‍म महावतार नरसिम्‍हा आई थी। उसमें भगवान विष्णु के चौथे अवतार नरसिम्हा भगवान की कहानी दिखाई गई थी। अब पल्‍लवी शर्मा की लिखी पटकथा में महाप्रभु जगन्नाथ की कहानी आई है जिन्‍हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

फिल्‍म आस्‍था, भक्ति और अहंकार जैसे विषयों को बारीकी से पेश करती है। फिल्‍म को विजुअली भव्‍य बनाने की कोशिश नजर आती है। बलराम हो या भगवान जगन्नाथ दोनों के एनिमेशन स्‍वरूप लुभाते हैं। निर्देशक श्रीपद वर्खेडकर ने क्‍लाइमैक्‍स में अहम कुमार के घमंड और ईश्‍वर के बीच की लड़ाई को दिलचस्‍प बनाया है। अपहरण के दृश्‍य भी रोचक हैं। फिल्‍म की डबिंग भी समुचित तरीके से की गई है।

कहां रह गई चूक?

हालांकि कुछ कमियां भी हैं। अहमासुर की दुनिया को थोड़ा और बेहतर रचने की गुंजाइश थी। अलग-अलग लोकों के सफर को भी रोमांचक बनाया जा सकता था। खास तौर पर अहमासुर के ग्रह पर हाथी बोलता है, लेकिन उस पर कुछ और जानवरों और उनकी जीवनशैली को दिखाने से यह काफी रोचक हो सकती थी।

Jagannath

कुछ किरदारों की डिजाइनिंग में बारीकी का अभाव है। उनके हाव-भाव और शारीरिक गतिविधियां कई दृश्यों में बनावटी लगती हैं। एनीमेशन में वह सहजता और प्रवाह भी नहीं है, जो आज की एनीमेशन फिल्मों की खासियत बन चुका है।

दिल छूता है संगीत

अविरल कुमार का संगीतबद्ध गाना खासकर जय जय जगन्नाथ, जय जय राम कृष्‍ण हरि कर्णप्रिय और भक्ति से ओतप्रोत हैं। कुल मिलाकर महाप्रभ जगन्नाथ पौराणिक कथाओं को सरल ओर मनोरंजक अंदाज में पहुंचाती है।

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