मनोज वशिष्ठ, नई दिल्ली। कोई इंसान अपने सपनों के पीछे कब तक भाग सकता है? कितना इंतजार कर सकता है? खासकर, तब जब सपना खेल से जुड़ा हो। खेलने की एक उम्र होती है, जिसके गुजरने के बाद सपने हकीकत की चट्टान से टकराकर बिखर जाते हैं, मगर उस इंसान के बारे में क्या कहिएगा, जिसने उस सपने को ही अपनी जिंदगी मान लिया हो और उसे पूरा करने के लिए सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हो।

डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई कौन प्रवीण ताम्बे? एक ऐसे ही सपने और उसे पूरा करने की जिद की कहानी है। जब उम्र खेल से संन्यास लेने के लिए कह रही हो और खिलाड़ी अपना करियर शुरू करने का सपना पूरा करे तो उसे प्रवीण ताम्बे कहा जाता है और फिर प्रवीण ताम्बे महज एक सवाल नहीं रहता, वो एक प्रेरणादायी जवाब बन चुका होता है। 

कौन प्रवीण ताम्बे? मुंबई के मुलुंड इलाके की चॉल में रहने वाले एक निम्नवर्गीय परिवार के लड़के की कहानी है, जिसने बचपन से एक ही सपना देखा कि रणजी ट्रॉफी खेलनी है। उसी मुंबई से, जहां क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर भी रहते हैं। कुछ सपने जहां कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि और जिम्मेदारियों के बोझ के नीचे आकर चकनाचूर हो जाते हैं, वहीं प्रवीण ताम्बे का सपना फौलादी इरादों से बना था, जिसे ताकत मिलती है बड़े भाई के प्रोत्साहन और जीवन में अलग-अलग पड़ावों पर मिले कुछ दोस्तों और साथियों के सपोर्ट से।

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गली क्रिकेट खेलते-खेलते शादी होती है, बच्चे होते हैं, मगर रणजी खेलने का सपना अभी भी पूरा नहीं होता। समय और उम्र गुजरते रहते हैं। रणजी खेलने की धुन उसे कभी शिपिंग कम्पनी में नौकरी के लिए ले जाती है तो कभी डांस बार में वेटर की नाइट शिफ्ट में। प्रवीण अपने सपने को पूरा करने की जद्दोजहद में लगा रहता है। आखिरकार, क्रिकेट के लिए उसका जुनून उसे आईपीएल की राजस्थान रॉयल्स टीम तक पहुंचा देता है, जहां प्रथम श्रेणी क्रिकेट ना खेले हुए भी प्रवीण ताम्बे अपना जौहर दिखाता है। उसका सपना सही था, बाकी सब गलत।

प्रवीण ताम्बे की कहानी में सिर्फ क्रिकेट और रणजी के लिए उसकी कोशिशें हैं, मगर सीधी-सपाट कहानी को किरण यज्ञोपवीत के स्क्रीनप्ले ने मनोरंजक और दिलचस्प बना दिया है। दृश्यों का लेखन और संयोजन ऐसा है कि बांधे रखता है। फिल्म की शुरुआत में राहुल द्रविड़ की ताम्बे को लेकर बाइट से पहले दृश्य का ट्रांजिशन प्रभावशाली है और फिल्म का मूड वहीं से सेट हो जाता है। ताम्बे का क्रिकेट के लिए जुनून, परिवार के सदस्यों के साथ उसका रिश्ता, लोकल क्रिकेट मैचों के दृश्य और उनकी चुटीली कमेंट्री फिल्म को धारा प्रवाह रखते हैं। 

हालांकि, सेकंड हाफ में फिल्म कुछ खिंची हुई लगती है, मगर बेहतरीन परफॉर्मेंसेज के कारण पकड़कर रखती है। मराठी फिल्मों से आये निर्देशक जयप्रद देसाई की कौन प्रवीण ताम्बे? पहली हिंदी फिल्म है। जयप्रद का निर्देशन सधा हुआ है। दृश्यों को खांचे में रखा है। कलाकारों को कहीं बहकने नहीं दिया। 

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प्रवीण ताम्बे के किरदार में श्रेयस तलपड़े ने पर्दे पर दोबारा क्रिकेट खेला है। अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म इकबाल से श्रेयस ने एक गेंदबाज के रूप में डेब्यू किया था और अब लेग स्पिनर प्रवीण ताम्बे के किरदार में उन्होंने वापसी की है। फर्क इतना है कि इकबाल युवा और काल्पनिक था, जबकि प्रवीण मिडिल एज का वास्तविक किरदार है। मगर, श्रेयस इस किरदार में जिस तरह से ढले हैं, वो कमाल है।

कोच विद्या पराडकर के किरदार में आशीष विद्यार्थी ने अच्छा काम किया है। मीडियम पेस बाउलर से लेग स्पिनर बनाने में उन्हीं की भूमिका रही और इस बदलाव ने ताम्बे को वहां पहुंचाया, जहां वो जाने का सपना देखता रहता था। ताम्बे की कहानी स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और क्रिकेटर बनने से चूके रजत सान्याल के नैरेशन के जरिए सामने आती है। ताम्बे की इस कहानी में इस किरदार की भूमिका भी अहम (थोड़ी नकारात्मक) है। सान्याल के रोल में परमब्रत चटर्जी ने ठीक लगे हैं। पत्नी वैशु के किरदार में अंजलि पाटिल बेहद नेचुरल लगी हैं। बाकी सहयोगी स्टार कास्ट ने भी अच्छा काम किया है। 

इस कहानी में कोई विलेन नहीं है। अगर होगा भी तो उसे हाइलाइट नहीं किया गया है। बस, ताम्बे के करियर में कुछ परिस्थितियां नकारात्मक रही हैं। फिल्म में यह सवाल भी छोड़ती है कि जो प्रवीण ताम्बे अपने डेब्यू आईपीएल मैच में विकेट्स की हैट ट्रिक बनाने का माद्दा रखता था, उसे रणजी खेलने का मौका 40 साल की उम्र तक नहीं मिल सका। हालांकि, फिल्म इस सवाल का जवाब खोजने की जहमत नहीं उठाती।

दो घंटे 13 मिनट की कौन प्रवीण ताम्बे? एक उम्मीद जगाने वाली फिल्म है, जिसमें जिद और जुनून के साथ खुद पर भरोसा रखने की सबसे बड़ी सीख मिलती है। जब दूसरे आपसे उम्मीद छोड़ दें तो आप खुद से उम्मीद बनाये रखें। क्रिकेट में दिलचस्पी रखने वालों ने प्रवीण ताम्बे का नाम सुन रखा होगा, मगर जिन्होंने नहीं सुना, वो अब नहीं पूछेंगे- कौन प्रवीण ताम्बे?  

कलाकार- श्रेयस तलपड़े, अंजलि पाटिल, आशीष विद्यार्थी, परमब्रत चटर्जी आदि।

निर्देशक- जयप्रद देसाई

निर्माता- शीतल भाटिया, सुदीप तिवारी।

प्लेटफॉर्म- डिज्नी प्लस हॉटस्टार

अवधि- 133 मिनट

रेटिंग- *** (तीन स्टार)

Edited By: Manoj Vashisth