अनुप्रिया वर्मा, मुंबई। राजकुमार राव को लगातार उनके अभिनय के लिए तारीफ सुनने को मिल रही है। हाल ही में रिलीज़ हुई बरेली की बर्फी में उन्होंने सबको हैरान किया था और अब उनकी फिल्म न्यूटन आ रही है।

काम पर फोकस

राजकुमार इस बात को नहीं भूलते कि उन्होंने यहां तक का सफर किस तरह तय किया है. राजकुमार कहते हैं "हां मैं मानता हूं कि मैं एक अंडरडॉग एक्टर ही हूं। जब मैं यहां आया था, मुझे कोई नहीं जानता था। इसके बाद मेरे काम को देख कर लोगों ने मुझे सराहना शुरू किया। यही वजह है कि मैं अब भी अपने सिर्फ काम पर मेहनत करता हूं। मैं इसे सेलिब्रेट करने में यकीन नहीं करता।"

ऐश के साथ स्क्रीन स्पेस

राजकुमार जल्द ही ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ फिल्म फन्ने खान में काम करने जा रहे हैं। वह राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्में देखते रहे हैं और उनसे काफी प्रभावित रहे हैं। ऐश के साथ पहली बार काम करने को लेकर राजकुमार उत्साहित हैं। उन्होंने बताया है कि फिलहाल उन्होंने फन्ने खान की टीम के साथ पहला शेडयूल पूरा किया है। राजकुमार का मानना है कि यहां कई लोग आते हैं लेकिन सबको मौके नहीं मिल पाते हैं। मैं लकी हूं कि मुझे स्क्रिप्ट्स अच्छी मिलती जा रही है। आज के वक्त में मैं हर तरह की फिल्म कर रहा हूं। अब जो फिल्में कर रहा हूं वो कर्मशियल भी होती जा रही हैं तो लोग वैसी कहानियां भी लिख रहे हैं। थैंक गॉड मैं अब किसी एक इमेज में नहीं बंध रहा हूं। क्वीन, काय पो छे , ट्रैप्ड हर तरह की फिल्में मेरे करियर को उछाल दे रही है। मैं हर दिन नया सीखने में यकीन करता हूं। मौका मिला तो कोई इंस्ट्रूमेंट सीखना चाहूंगा।

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बच्चन का लेटर

राजकुमार बताते हैं कि हाल ही में जब उन्हें अमिताभ बच्चन के हाथों से लिखा हुआ लेटर मिला तो बहुत ख़ुशी कि बिग बी ने अब भी युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए हाथ से लेटर(बिना कंप्यूटर के) लिखने की परंपरा जारी रखी है।

ओमेटा का आतंकी

राजकुमार ने अपनी आने वाली फिल्म ओमेटा के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि ओमर सईद शेख, किस तरह ब्रिटिश मूल का आतंकवादी बन जाती है। फिल्म उसकी कहानी है और काफ़ी रोमांचक है। यह फिल्म उन्होंने अपने मेंटॉर हंसल मेहता के साथ की है। राजकुमार कहते हैं कि हंसल मेहता के साथ उन्हें सीखने का मौका मिलता है। इसलिए वह हर बार उनके साथ काम करते रहना चाहते हैं।  

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इस फिल्म के बारे में बात करते हुए राजकुमार कहते हैं कि फिल्म के दौरान मुझे महसूस हुआ कि इलेक्शन करवाना आसान नहीं होता है. गिर फॉरेस्ट में तो एक वोटर के लिए पूरी पोलिंग बूथ होती थी। यह आसान काम नहीं था। हर साल हम इलेक्शन के दौरान नये रिकॉर्ड बनाते हैं और खुद ही तोड़ भी देते हैं। जहां हम शूट कर रहे थे, वहां के लोगों को देख कर यही लगा कि उनके पास कुछ नहीं है। फिर भी वह खुश हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान होती है। इस फिल्म में कई स्थानीय लोगों को दिखाया गया है।

Posted By: Manoj Khadilkar